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Chanakya Niti: हमेशा समस्याओं से घिरे रहते हैं ऐसे लोग, जीवन में भी बनी रहती है अशांति

Wed, 18 Sep 2024 01:18 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Chanakya Niti - फोटो : अमर उजाला
Chanakya Niti: चाणक्य, जो 'कौटिल्य' के नाम से भी विख्यात हैं। उनकी गिनती अच्छे राजनेता, शिक्षक और दार्शनिक के रूप में की जाती है। उन्हेंनें एक महान ग्रंथ की रचना भी की है, जिसे चाणक्य नीति के नाम से जाना जाता है। इस नीति शास्त्र में राजनीति, युद्ध और जीवन से जुड़ी कई बातों का उल्लेख है, जिनके अध्ययन से उचित मार्गदर्शन की प्राप्ति होती हैं।

आचार्य चाणक्य ने जहां जीवन को संवारने के लिए सूत्र दिए हैं, वहीं उन्होंने मनुष्य की उन आदतों का जिक्र भी किया है, जिसके चलते वह हमेशा समस्याओं से घिरा रहता है। उनका मानना है कि इंसान की झूठ बोलने की आदत उसे दोषी बनाती है। वह अपने श्लोक में कहते हैं कि ।। व्यवहारेऽन्तर्गतमाकारः सूचयति ।। इसका अर्थ है कि व्यक्ति के मन में क्या है, यह उसके चेहरे से प्रकट होता है। इसलिए झूठ बोलने का कोई अर्थ नहीं होता है। झूठ से हमेशा इंसान की समस्याएं बढ़ती हैं। ऐसे ही कई अन्य बुरी आदतों का जिक्र चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में किया है, आइए उनके बारे में जानते हैं।
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Chanakya Niti - फोटो : freepik
।। प्रच्छन्नपापानां साक्षिणो महाभूतानि ।।
इस श्लोक का अर्थ है कि छिपकर किए गए पापों के साक्षी पंचमहाभूत पृथ्वी, जल, तेज, वायु और आकाश होते हैं। चाणक्य नीति के अनुसार यदि कोई व्यक्ति पाप करता है, तो उसका पाप उसके मुख और कार्यों से प्रकट होने लगता है। जिससे कार्य पर उसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए जीवन में इंसान को पाप करने से डरना चाहिए। साथ ही गलत मार्ग से भी दूरी बनाकर रखनी चाहिए।
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Chanakya Niti - फोटो : freepik
।। आत्मनः पापमात्मैव प्रकाशयति ।।
चाणक्य नीति के इस श्लोक का अर्थ है कि पाप करने वाले इंसान के मन में हमेशा अशांति बनी रहती हैं। साथ ही उसका मन हमेशा बेचैन रहता है, जिससे वह अपने पाप को स्वीकार करने के लिए विवश हो जाता है। 

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Chanakya Niti - फोटो : freepik
।। कूटसाक्षिणो नरके पतन्ति ।।
चाणक्य के इस श्लोक का अर्थ है कि झूठ का समर्थन करने वाले लोग नरक में जाते हैं, और हमेशा समस्याओं से घिरे रहते हैं। साथ ही ऐसे लोग दुख के भागीदार बनते हैं। इसलिए परिस्थिति चाहे कैसी भी हो इंसान को झूठ का सहारा नहीं लेना चाहिए। 
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Chanakya Niti - फोटो : freepik
।। न स्यात् कूटसाक्षी ।।
चाणक्य नीति के इस श्लोक के अनुसार मनुष्य को कभी भी कपट का समर्थक नहीं बनना चाहिए। इंसान को अपने जीवनकाल में एक ऐसा सिद्धांत बनाना चाहिए, जिससे की वह कभी किसी झूठ का साक्षी न बनें। उसे सदैव सत्य पर दृढ़ रहकर सत्य का ही समर्थन करना चाहिए।

आचार्य चाणक्य द्वारा दिए गए यह सूत्र संपूर्ण 'चाणक्य नीति, चाणक्य सूत्र और जीवन गाथा' मनोज पब्लिकेशन के लेखक द्वारा संपादित पुस्तक से लिए गए हैं।
 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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