मध्यप्रदेश पर्यटन की जब भी बात आती है तो सबसे पहला नाम आता है खजुराहो का क्योंकि पूरी दुनिया में यहां के मंदिर प्रसिद्ध हैं। मंदिर की प्रसिद्धि इसलिए नहीं है कि यहां मौजूद देवी-देवता बड़े चमत्कारी हैं बल्कि प्रसिद्धि की वजह है मंदिर के बाहरी दीवारों में बनी मिथुन मूर्तियां जिनमें कामकला की अद्भुत झलक मिलती है।
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खजुराहो की मिथुन मूर्तियों का राज
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खजुराहो
यहां आने वाले पर्यटक कई बार हैरान होते हैं कि मंदिर की बाहरी दीवारों पर इस तरह के चित्र क्यों उकेरे गए हैं क्योंकि मंदिर जहां अध्यात्मिकता और मुक्ति का बोध कराते वहीं दीवारों पर बने चित्र कामुकता और भोग की ओर ले जाते हैं। यानी दोनों ही चीजें दो विपरीत दिशाओं की ओर ले जाते हैं।
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खजुराहो की मिथुन मूर्तियों का राज
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दरअसल यह दोनों चीजें एक दूसरे से अलग नहीं हैं बल्कि एक दूसरे को जोड़ते। यही कारण है कि खजुराहो के समकालीन और बाद के कुछ मंदिरों में भी इस तरह की मूर्तियां मंदिरों की दीवारों पर बनाई गयी हैं। इसके पीछे एक दार्शनिक दृष्टिकोण दर्शाया गया है।
खजुराहो की मिथुन मूर्तियों का राज
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मंदिर की बाहरी दीवारों पर मिथुन मूर्तियां बाहरी दुनिया का बोध कराती है कि यह पूरी दुनिया काम और भोग से भरपूर है। जबकि केन्द्र में अध्यात्म है, ईश्वर का वास है और मुक्ति है। इसलिए मुक्ति की कामना है तो भोग और काममय दुनिया को बाहर रखकर अंदर प्रवेश करें। बाहर की दुनिया की सारी बातों को बाहर रखकर आएं।
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खजुराहो की मिथुन मूर्तियों का राज
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दूसरा एक और कारण जो मिथुन मूर्तियों को लेकर समझ में आता है वह यह है कि भगवन शिव को मैथुनी सृष्टि का जनक माना जाता है। इसलिए शिव के मंदिर को मिथुन मूर्तियों से सजाया गया है।
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खजुराहो की मिथुन मूर्तियों के 5 राज
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तीसरा कारण जो मिथुन मूर्तियों को लेकर समझ आता है वह यह है कि मध्यकाल तक वक्ष का आवरण रहित होना सौन्दर्य की परिभाषा के तौर पर देखा जाता था इसलिए दक्षिण भारत की कई मूर्तियों में देवी के वक्ष को आवरण रहित दिखाया गया है। इस बात का उल्लेख देवदत्त पट्टनायक ने 'देवी के सात रहस्य' नाम की पुस्तक में किया है। हलांकि देवी ने अपने गले में कई आभूषण धारण किया हुआ है जिससे वक्ष का काफी भाग ढ़का हुआ है। खजुराहो के मंदिर में मूर्तियों को खुले वक्ष में दर्शाना इसी सौन्दर्य बोध का प्रतीक हो सकता है।
मंदिर की दीवारों पर मिथुन मूर्तियों के होने की एक और वजह हो सकती है कि संसार को चलाने वाले भगवान को पुरूष कहा गया है और पूरी सृष्टि को प्रकृति कहा गया है। प्रकृति और परुष का मिलन ही इस पूरी सृष्टि और ब्रह्माण्ड का आधार माना गया है। इसी दार्शनिक भाव को दर्शाने के लिए मंदिर की दीवारों पर मिथुन मूर्तियों को उकेड़ा गया हो सकता है।