Kabir Ke Dohe: संत कबीर दास हिंदी साहित्य के ऐसे कवि थे, जिन्होंने समाज में फैली भ्रांतियों और बुराइयों को दूर करने में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। अपने दोहों के जरिए कबीर दास जी ने लोगों में भक्ति भाव का बीज बोया। कबीर दास न सिर्फ एक संत थे बल्कि वे एक विचारक और समाज सुधारक भी थे। कबीर दास जी के दोहे अत्यंत सरल भाषा में थे, जिसके कारण इनके दोहों ने लोगों पर व्यापक प्रभाव डाला। आज भी कबीर दास जी के दोहे जीवन जीने की सही राह दिखाते हैं। तो चलिए आज पढ़ते हैं संत कबीर के कुछ ऐसे ही अनमोल दोहे....
गुरु गोविंद दोउ खड़े, काके लागूं पांय
बलिहारी गुरु आपनो, गोविंद दियो बताय।
अर्थ- गुरु और गोविंद यानी भगवान दोनों एक साथ खड़े हैं। पहले किसके चरण-स्पर्श करें। कबीरदास जी कहते हैं, पहले गुरु को प्रणाम करूंगा, क्योंकि उन्होंने ही गोविंद तक पहुंचने का मार्ग बताया है।