mantra jap
आसन का महत्व
शास्त्रों के अनुसार जिस स्थान पर ईष्ट को बैठाया जाता है उसे दर्भासन कहते हैं। जिस पर साधक बैठे वो आसन है। योग विज्ञान में शरीर को भी आसन कहा गया है। पौराणिक मान्यता के अनुसार कंबल के आसन पर बैठकर जप-तप, पूजा-पाठ करना सर्वश्रेष्ठ कहा गया है। जिसमे लाल रंग का कंबल/आसन माँ दुर्गा, लक्ष्मी और हनुमान की पूजा के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। कंबल के अभाव में भगवान विष्णु के शरीर से उत्पन्न कुश का आसन प्रयोग करें। इस पर बैठकर पूजा करने से सर्वसिद्धि मिलती है।
पिंडदान, श्राद्ध इत्यादि के कार्यों में कुश का आसन ही श्रेष्ठ माना गया है। मृगचर्म का आसन ब्रह्मचर्य, ज्ञान, वैराग्य, सिद्धि, शांति एवं मोक्ष प्रदान करने वाला सर्वश्रेष्ठ आसन है। बाघचर्म आसन का प्रयोग बड़े-बड़े यति, योगी तथा साधु-महात्मा एवंस्वयं भगवान शंकर करते हैं। यह आसन सात्विक गुण, धन-वैभव, भू-संपदा, पद-प्रतिष्ठा आदि प्रदान करता है।