आचार्य चाणक्य
- फोटो : Social media
अन्नाद्दशगुणं पिष्टं पिष्टाद्दशगुणं पयः
पयसोऽष्टगुणं मांसं मांसाद्दशगुणं घृतम्
आचार्य चाणक्य इस श्लोक में सर्वप्रथम बताते हैं कि व्यक्ति के जीवन के लिए अनाज बहुत पुष्टिवर्धक होता है और पीसा हुआ अनाज यानी सबसे ज्यादा ताकतवर आटा होता है, क्योंकि इससे बनी रोटी खाने के बाद व्यक्ति पूरे दिन ऊर्जावान बना रहता है। रोटी खाने से पाचन तंत्र सही रहता है जिससे पेट से जुड़ी परेशानियां नहीं होती हैं और मनुष्य की सेहत अच्छी रहती है।