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Chanakya Niti: जीवन में इन तीन लोगों से कभी न करें दोस्ती, बढ़ सकती हैं आपकी परेशानियां

Tue, 30 Jul 2024 12:30 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Chanakya Niti for friendship - फोटो : अमर उजाला
Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य, जो 'कौटिल्य' के नाम से भी विख्यात हैं। उनकी गणना देश के महान सलाहकार में की जाती है। आचार्य चाणक्य ने महान ग्रंथ की रचना की है, जिसे चाणक्य नीति के नाम से जाना जाता है। इस नीति शास्त्र में जीवन से जुड़ी कई ऐसी बातों का जिक्र हैं, जो युवाओं को मार्गदर्शित करने में काम आती है। आज भी कुछ लोग विपरीत परिस्थितियों में चाणक्य नीति का पालन करते है। वहीं आचार्य चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में उन लोगों का जिक्र भी किया है, जिनसे मित्रता नहीं रखनी चाहिए।

जीवन में मित्र की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। एक सच्चा मित्र जीवन के सुख-दुख में हमेशा साथ रहता है, जिससे परिस्थितियों से लड़ने की हिम्मत मिलती हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो आपकी समस्याओं को बढ़ा सकते हैं। उनसे दोस्ती रखने पर हमेशा बुरे परिणाम मिलते है। ऐसे में आइए इनके बारे में जान लेते हैं।

Chanakya Niti: जीवन में कभी भी इन 3 लोगों को न बताएं परेशानी, समस्याओं का बढ़ सकता है स्तर
 
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Chanakya Niti for friendship - फोटो : freepik
दुर्जनस्य च सर्पस्य वरं सर्पो न दुर्जनः ।
सर्पो दंशति काले तु दुर्जनस्तु पदे पदे ।।


इस श्लोक का अर्थ है कि एक सांप दुर्जन व्यक्ति से ज्यादा सही है। हम सभी जीवन में कई लोगों से मित्रता रखते हैं। घनिष्ठ मित्रता होने के बावजूद भी जरूरत के समय वह काम नहीं आते हैं। इसी पर आचार्य चाणक्य का मानना है कि दुर्जन मनुष्य से मित्रता कभी नहीं करनी चाहिए। ये लोग कभी आपका भला नहीं कर सकते हैं। 
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Chanakya Niti for friendship - फोटो : istock
लालची लोग
चाणक्य के अनुसार लालची लोगों से कभी मित्रता नहीं रखनी चाहिए। ऐसे लोग लालच के चलते आपको नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए इनसे हमेशा दूरी बनाकर रखें।

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Chanakya Niti for friendship - फोटो : istock
गलत संगत
आचार्य चाणक्य के अनुसार गलत संगत में रहने वाले लोगों से हमेशा दूरी बनाकर रखनी चाहिए। ऐसे लोग सफलता हासिल करने में बाधा उत्पन्न कर सकते है। ऐसा माना जाता है कि गलत संगत व्यक्ति को मुसीबत में फंसा सकती है।
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Chanakya Niti for friendship - फोटो : istock
प्रलये भिन्नमार्यादा भविंत किल सागर:
सागरा भेदमिच्छन्ति प्रलेयशपि न साधव:।


इस श्लोक का अर्थ है कि जब भी प्रलय आती है, तो समुद्र भी अपनी सीमाओं को तोड़ देता है। लेकिन एक सज्जन आदमी प्रलय के समान स्थिति में भी अपनी सीमा नहीं लांघता है। चाणक्य के अनुसार सज्जन व्यक्ति हमेशा धैर्यवान होते हैं। ऐसे लोगों से हमेशा मित्रता रखनी चाहिए।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस लेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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