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चाणक्य नीति: इन परिस्थितियों में माता-पिता, पति-पत्नी और संतान भी बन जाते हैं शत्रु

Thu, 27 May 2021 06:59 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
आचार्य चाणक्य कुशाग्र बुद्धि के एक श्रेष्ठ विद्वान थे। ये चंद्रगुप्त मौर्य के महामंत्री थे। इन्होंने अपनी नीतियों और बुद्धि को बल पर चंद्रगुप्त को एक साधारण बालक से सम्राट बनाने में महत्पूर्ण भूमिका निभाई। आचार्य चाणक्य राजनीति शास्त्र, समाज शास्त्र और अर्थशास्त्र समेत कई विषयों में परांगत थे। इन्होंने विश्वप्रसिद्धि तक्षशिला विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण की और यही पर आचार्य रहते हुए विद्यार्थियों के शिक्षा भी प्रदान की। आचार्य चाणक्य के द्वारा लिखे गए नीति शास्त्र में लिखी नीतियों जीवन से जुड़े हर पहलू को स्पर्श करती हैं। आचार्य चाणक्य की नीतियां लोगों को बहुत कठिन लगती हैं लेकिन ये मनुष्य को जीवन की सत्यता से अवगत कराती हैं। कुछ परिस्थितियों में चाणक्य ने माता-पिता, पति-पत्नी और संतान को भी शत्रु बताया है। जानते हैं कि कौन सी हैं वे परिस्थितियां।
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
चाणक्य नीति के अनुसार जो पिता अत्यधिक कर्ज ले लेता है और उसे चुकाता नहीं है, वह अपने पुत्र के लिए शत्रु के समान होता है। पिता द्वारा लिए गए कर्ज के बोझ के कारण पुत्र का जीवन कष्टकारी हो जाता है। इस परिस्थिति में पिता अपने पुत्र के लिए शत्रु की तरह होता है।
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
एक मां और संतान के मध्य का रिश्ता सब रिश्तों से ऊपर होता है, लेकिन जब एक मां अपनी संतानों में भेद करती हैं और एक जैसा व्यवहार नहीं करती है तब वह अपनी संतान के लिए शत्रु समान होती है। इसके अलावा जिस स्त्री के संबंध अन्य पुरुष के साथ होते हैं, वह भी अपने पुत्र के लिए शत्रु के समान होती है। इसके अलावा जो माता-पिता अपनी संतान को अशिक्षित रखते हैं तो वह अपनी संतान के लिए शत्रु के समान होते हैं।

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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
चाणक्य नीति के अनुसार अत्यधिक सुंदर पत्नी कभी-कभी पति के लिए समस्या का कारण होती है तो वहीं जो पति अपनी पत्नी की रक्षा न कर पाए वह अपनी पत्नी के लिए शत्रु के समान होता है।
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
चाणक्य कहते हैं कि जो संतान मूर्ख होती है वह अपने माता-पिता के लिए किसी शत्रु से कम नहीं होती है। मूर्ख और आज्ञा न मानने वाली संतान अपने माता-पिता के जीवन को दुखों से भर देती है। ऐसी संतान शत्रु के समान होती है।
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आचार्य चाणक्य - फोटो : social media
संतान दुश्मन से कम नहीं होती है। संतान के मूर्ख होने से माता-पिता का जीवन दुखों से भर सकता है। इसके अलावा जो माता-पिता अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा और परवरिश नहीं देते हैं, वह संतान के लिए दुश्मन समान होते हैं।
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