आचार्य चाणक्य चंद्रगुप्त मौर्य के महामंत्री और मौर्य साम्राज्य के संस्थापक थे। इन्हें चाणक्य नाम अपने गुरु चणक से प्राप्त हुआ था। इसके अलावा कई विषयों का गहन ज्ञान होने के कारण ये कौटिल्य के नाम से भी विख्यात थे। ये कूटनीति और राजनीति में कुशल थे। इसके अलावा ये एक महान अर्थशास्त्री होने के साथ योग्य शिक्षक भी थे। इनके जीवन का एक बड़ा भाग अध्ययन-अध्यापन में ही व्यतीत हुआ था। आचार्य चाणक्य ने अपने जीवन में विपरीत से विपरीत परिस्थितियों का भी सामना किया परंतु कभी भी अपना धैर्य नहीं खोया और अपनी बुद्धिमत्ता व नीतियों के बल पर इन्होंने नंदवंश का नाश करके चंद्रगुप्त को एक शासक के रुप में स्थापित करके इतिहास की धारा को बदल कर रख दिया था। इनका जीवन हर व्यक्ति के लिए प्रेरणादायी है। इसकी साथ इनके द्वारा लिखे गए नीतिशास्त्र की बातें भी मनुष्य को सही राह दिखाती हैं। आज के समय में भले ही कुछ लोग इनकी नीतियों से सहमत न होते हो या फिर इनकी नीतियों को बहुत ही कठोर समझते हैं लेकिन ये कठोरता ही जीवन की सच्चाई है। आचार्य चाणक्य ने नीतिशास्त्र में निजी रिश्तों से लेकर आर्थिक, सामाजिक सभी के विषये में अपने विचार व्यक्ति किए हैं। इसी विषय में आचार्य चाणक्य ने ऐसी परिस्थितियों का वर्णन भी किया है जब माता-पिता और संतान भी एक दूसरे के लिए शत्रु हो सकते हैं। तो आइए जानते हैं कि कौन सी हैं वे परिस्थितियां।