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Life Management Tips From Hanuman ji : हनुमान जी से सीखें ये ख़ास गुण, जीवन में आएगा बदलाव

Tue, 16 May 2023 11:35 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Managment Skills Tips From Hanuman Ji
Managment Skills Tips From Hanuman Ji:  हिंदू पौराणिक कथाओं के इतिहास में,पवनपुत्र  हनुमान सबसे लोकप्रिय और व्यापक रूप से पूजे जाने वाले देवताओं में से एक हैं। अंजनीपुत्र हनुमानजी के भक्त चाहे वो युवा हों या वृद्ध पुरुष हों या महिलाएं सभी उनकी श्रद्धापूर्वक पूजा करते हैं। भगवान हनुमान साहस,चरित्र, भक्ति और सदाचार के आदर्श प्रतीक हैं। उनका जीवन,कर्म और चरित्र हमारे लिए अनुकरणीय हैं। हनुमानजी एक कुशल प्रबंधक थे। मन,कर्म और वाणी पर संतुलन यह हनुमान जी से सीखा जा सकता है। सही समय पर सही कार्य करना उनका चमत्कारिक गुण था। आइए जानते हैं आज के समय में हनुमान जी से प्रबन्धन की कौन सी कला सीखी जाने की आवश्यकता है। 
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Managment Skills Tips From Hanuman Ji
पूर्ण और निस्वार्थ समर्पण
यह सर्वविदित है कि भगवान हनुमान भगवान राम के पूर्ण निःस्वार्थ भक्त थे। यह भक्ति और अमर प्रेम ही था जिसने उन्हें राम और अन्य देवताओं का सम्मान अर्जित किया। उसी तरह आपको भी अपने उद्देश्य,अपने करियर और अपने अंतिम लक्ष्य के प्रति पूरी तरह और निःस्वार्थ रूप से समर्पित रहना चाहिए। अपने पेशे के प्रति निरंतर समर्पित और निस्वार्थ प्रतिबद्धता लंबे समय में समृद्ध लाभ दिलाएगी।
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Managment Skills Tips From Hanuman Ji - फोटो : Social media
कार्य कुशलता और निपुणता 
हनुमानजी किसी भी कार्य में कुशल और निपुण थे। उन्होंने सुग्रीव की सहायता हेतु उन्हें श्रीराम से मिलाया और श्रीराम की सहायता के लिए सब कुछ अपनी बुद्धि कौशल से किया। ये उनका विशिष्ट प्रबन्धन ही  था जब हनुमानजी ने सेना से लेकर समुद्र को पार करने तक का कार्यभार संभाला और बुद्धि कौशल के जरिये उसे पूर्ण किया ।

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Managment Skills Tips From Hanuman Ji
दूरदर्शिता 
हनुमानजी दूरदर्शी ही थी तभी उन्होंने सुग्रीव से श्रीराम की मैत्री कराई और बाद में उन्होंने विभीषण की श्रीराम से मैत्री कराई। जहाँ सुग्रीव ने श्रीराम की मदद से बालि को मारा तो श्रीराम ने विभीषण की मदद से रावण को मारा। हनुमानजी की दूरदर्शिता के कारण ही यह सम्भव हुआ।
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Managment Skills Tips From Hanuman Ji - फोटो : social media
नेतृत्वगुण 
हनुमानजी संपूर्ण वानर सेना के सेनापति थे। उनके अंदर नेतृत्वगुण था, वह सभी को साथ लेकर चलने में विश्वास रखते थे। कठिनाइयों में भी निर्भयता और साहसपूर्वक साथियों का सहायक और मार्गदर्शक बनकर लक्ष्य प्राप्ति के लिए सबकी सलाह सुनकर आगे बढ़ने के कारण ही वह सफल हो पाए और ये सब उनके नेतृत्व गुण के कारण ही हो पायाने का गुण हो वही तो लीडर बन सकता है।
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