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Vivah Panchami 2022: भगवान राम और माता सीता के वैवाहिक जीवन से सीखें ये बातें, पति-पत्नी में बना रहेगा प्यार

Mon, 28 Nov 2022 09:51 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भगवान राम और माता सीता के वैवाहिक जीवन से सीखें ये बातें - फोटो : Facebook
Vivah Panchami 2022: आज यानी 28 नवंबर 2022 को विवाह पंचमी है। ये पर्व प्रत्येक वर्ष अगहन मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। विवाह पंचमी का ये पर्व भगवान राम और माता सीता के विवाह उत्सव के रूप में माना जाता है। इस दिन मंदिरों में आयोजन किए जाते हैं। साथ ही प्रभु श्री राम और सीता की पूजा की जाती है। वैसे तो भगवान राम और माता सीता का वैवाहिक जीवन संघर्षों भरा था, इसके बावजूद भी जब भी आदर्श पति-पत्नी के उदाहरण की बात आती है तो लोग श्रीराम और माता सीता का ही नाम लेते हैं। श्री राम और सीता जी ने अपने जीवन में ऐसे कई उदाहरण पेश किए हैं, जिन्हें अपना कर कोई भी पति-पत्नी अपने वैवाहिक जीवन को सफल बना सकते हैं। तो चलिए आज जानते हैं कि राम-सीता के वैवाहिक जीवन से क्या सीख मिलती है...

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भगवान राम और माता सीता के वैवाहिक जीवन से सीखें ये बातें - फोटो : Facebook
हर परिस्थिति में साथ रहना 
जब भगवान राम को वनवास सुनाया गया तो माता सीता भी उनके साथ महल छोड़कर जंगल में रहने के लिए तैयार हो गईं। भगवान राम ने माता सीता से महल में ही रहने का आग्रह किया, लेकिन माता सीता ने राम जी के वनवास जाने का निर्णय किया और उनके साथ वनवास गईं। इस तरह से भगवान राम और माता के वैवाहिक जीवन में हमें सीख लेनी चाहिए कि परिस्थिति चाहें जो भी हो पति-पत्नी को हमेशा हर परिस्थिति में एक-दूसरे का साथ निभाना चाहिए।
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भगवान राम और माता सीता के वैवाहिक जीवन से सीखें ये बातें - फोटो : iStock
त्याग की भावना
माता सीता राजा जनक की पुत्री थी। उन्होंने बचपन से ही अपना जीवन महल में बिताया था। विवाह के पश्चात भी वे जनकपुरी से अयोध्या आई, परंतु उन्होंने भगवान राम के लिए सभी सुखों का त्याग कर दिया और उनके साथ वन में जाने का निर्णय लिया। ऐसे में किसी भी रिश्ते को मजबूत बनाए रखने के लिए जरुरत पड़ने पर पति-पत्नी को कुछ चीजों का त्याग करने की भावना होना आवश्यक होता है।

 

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भगवान राम और माता सीता के वैवाहिक जीवन से सीखें ये बातें - फोटो : iStock
निःस्वार्थ भाव से प्रेम
प्रभु श्री राम और माता सीता ने हमेशा एक दूसरे से निस्वार्थ भाव से प्रेम किया, इसलिए हर परिस्थिति में एक दूसरे के साथ रहे और उनका रिश्ता मजबूत बना रहा। इस तरह से भगवान राम जी माता सीता के वैवाहिक से हमें सीख मिलती है कि हमेशा निस्वार्थ भाव से प्रेम करना चाहिए। 



 
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भगवान राम और माता सीता के वैवाहिक जीवन से सीखें ये बातें - फोटो : iStock
पतिव्रता और पत्नीव्रता
माता सीता और प्रभु राम ने जीवन भर पतिव्रता और पत्नीव्रता होने का धर्म निभाया। रावण द्वारा हरण के बाद भी माता सीता ने अपनी इज्जत पर आंच न आने दी और अंत तक रावण के सामने नहीं झुकीं। भगवान राम से दूर रहने के बाद भी सीता जी ने अपने पत्नी धर्म पर आंच न आने दी। वहीं श्रीराम ने भी पत्नी की अनुस्थिति में अश्वमेघ यज्ञ के दौरान उनकी सोने की प्रतिमा बनवा कर उसे साथ बैठाया। एक राजा होते हुए भी उन्होंने पत्नी सीता के दूर जाने के बाद भी दूसरी स्त्री से विवाह नहीं किया। दोनों के बीच दूरियों के बाद भी माता सीता और श्रीराम का एक दूसरे के लिए प्रेम कम नहीं हुआ। 
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