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Vidur Niti: इन 4 भावों पर मनुष्य को रखना चाहिए नियंत्रण, अन्यथा जीवन हो जाता है बर्बाद

Wed, 31 Mar 2021 07:45 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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vidur niti - फोटो : Social Media
महाभारत में विदुर कौरवों और पांडवों के काका थे, परंतु उन्होंने युद्ध में किसी की भी ओर से युद्ध नहीं करने का निर्णय लिया। महात्मा विदुर अत्यंत ज्ञानी और दूरदर्शी थे। उन्होंने सबसे पहले ही बता दिया था कि महाभारत के युद्ध का परिणाम बहुत ही घातक होगा। विदुर जी के द्वारा बताई गई बातें आज भी विदुर नीति के रूप में प्रचलित हैं। विदुर जी की शिक्षाएं आज भी मनुष्य के जीवन में बहुत महत्व रखती हैं। विदुर जी ने चार ऐसे भावों के बारे में बताया है जिनसे मनुष्य अपने जीवन में कभी न कभी अवश्य फंसता है, यदि वह इन भावों पर समय रहते नियंत्रण पा लेता है तो वह बुद्धिमान कहलाता है अन्यथा इन भावों के भंवर में फंसकर मनुष्य अपना जीवन बर्बाद हो जाता है।
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vidur - फोटो : Social Media
क्रोध 
आचार्य विदुर स्वयं भी अत्यंत ही सरल और शांत स्वभाव के थे। विदुर नीति के अनुसार मनुष्य को क्रोध के भाव पर नियंत्रण रखना चाहिए। इस स्थिति में व्यक्ति को सही और ग़लत का भान नहीं रहता है। क्रोध मनुष्य की बुद्धि का सबसे बड़ा शत्रु है। क्रोध में आकर मनुष्य दूसरों के साथ स्वयं का भी अहित कर बैठता है, इसलिए इससे बचना चाहिए।
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vidur niti - फोटो : pinterest
हर्ष यानी अति उत्साह
आचार्य विदुर के अनुसार अत्यधिक उत्साह भी मनुष्य के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है। अत्यंत हर्ष की स्थिति में भी मनुष्य को अपने ऊपर नियंत्रण रखना चाहिए। ऐसे समय व्यक्ति अपने भावों के कारण मानसिक संतुलन खो देता है। अत्यधिक हर्ष में लिया गया निर्णय आपके जीवन को भी बर्बाद कर सकता है।

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vidur niti - फोटो : SELF
ह्री यानी विनय
यहां इसका अर्थ चापलूसी से माना गया है। यह भाव व्यक्ति के लिए बहुत ही नुकसानदायक सिद्ध होता है। मनुष्य को कभी किसी की चापलूसी में नहीं फंसना चाहिए।
 
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vidur - फोटो : self
स्वयं के पूज्य समझने का भाव
महात्मा विदुर कहते हैं कि स्वयं के पूज्य का भाव भी व्यक्ति के मस्तिष्क पर प्रभाव डालता है। स्वयं को पूज्य यानि सबसे ऊपर समझने के भाव से मनुष्य में अहंकार को जन्म देता है और अहंकार से मनुष्य की बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है।
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