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रामराज्य के 5 ऐसे फैसले जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे

Mon, 08 Aug 2016 03:14 PM IST
राकेश्ा झा / टीम डिजिट, अमर उजाला, दिल्ली।
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राम सीता
रावण का वध करने के बाद जब भगवान राम अयोध्या लौटे तब इनका राज्याभ‌िषेक क‌िया गया और रामराज्य शुरू हुआ। ऐसी कथाएं हैं क‌ि राम राज्य में प्रकृत‌ि अनुकूल चलती थी। प‌िता के जीव‌ित रहते हुए कभी पुत्री की मृत्यु नहीं होती थी। मौसम समय से बदलते हर तरफ सुख शांत‌ि और खुशहाली थी। इसल‌िए आज भी अच्छे शासन की तुलना रामराज्य से की जाती है। लेक‌िन राम राज्य में भगवान राम ने 5 ऐसे फैसेले क‌िए ज‌िसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे क‌ि भगवान राम ऐसा कैसे कर सकते हैं।
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रामराज्य के 5 ऐसे फैसले ज‌िसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे

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राम सीता
शत्रुघ्न हुए सभी से दूरः  रामचंद्र जी के राजा बनने के कुछ समय बाद ऋष‌ि मुन‌ि राम जी के पास सुंदर नामक असुर की श‌िकायत लेकर पहुंचे। असुर को दंड देने के ल‌िए राम जी भरत को भेजना चाहते थे लेक‌िन छोटे भाई शत्रुघ्न ने कह द‌िया क‌ि भरत भैय्या ने आपकी काफी सेवा क‌ि है मुझे भी आपकी सेवा का अवसर म‌िले। राम जी ने राम जी की इच्छा को बीच में काटते हुए अपनी इच्छा वक्त कर दी सो राम जी ने शत्रुघ्न को सुंदर का वध करने के ल‌िए सेना सह‌ित जाने का आदेश द‌िया। साथ ही सुंदर की नगरी का राजा भी बना द‌िया और कहा क‌ि अब से तुम सुंदर की नगरी में ही रहो और वहां की राज काज देखो। भगवान राम के इस आदेश से शत्रुघ्न दुखी हो गए क‌ि बड़े भाई के आदेश को काटने की वजह से उन्हें सभी से दूर जाना पड़ रहा है। सुंदर का वध करने के बाद शत्रुघ्न ने मधुरापुरी राज्य बसाया और 12 साल तक यहां रहने के बाद वापस श्रीराम से आकर म‌िले।
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देवी सीता के साथ भगवान राम का न्‍याय

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सीता लव कुश्‍ा
देवी सीता की लंका में अग्न‌ि परीक्षा हो चुकी थी और भगवान राम को इस बात का पूरा भरोसा था क‌ि देवी सीता पत‌िव्रता हैं बावजूद इसके एक धोबी ने देवी सीता के चर‌ित्र को लेकर सवाल उठा द‌िया। भगवान राम ने राजधर्म का पालन करते हुए देवी सीता को वनवास भेजने का आदेश दे द‌िया और वह भी उस समय जब देवी सीता गर्भवती थी।

रामराज्य के 5 ऐसे फैसले ज‌िसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे

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राम सीता
लक्ष्मण को मृत्यु दंडः कदम-कदम पर श्री राम का साथ देने वाले लक्ष्मण को भगवान राम ने मृत्युदंड था। इसका कारण यह था क‌ि जब भगवान राम की लीला समाप्त करने का समय आ गया था उस समय एक द‌िन यमराज भगवान राम के पास आए और अकेले में म‌िलने की इच्छा प्रकट की। यमराज ने कहा क‌ि हम दोनों की मुलाकात के बीच जो भी आएगा उसे आप प्राणदंड देंगे। भगवान राम ने यमराज की बात मान ली और द्वार पर लक्ष्मण जी को बैठा द‌िया। इसी बीच ऋष‌ि दुर्वासा वहां आ गए और तुरंत श्री राम से म‌िलने की इच्छा प्रकट की और मजबूर होकर लक्ष्मण जी को राम जी के पास जाना पड़ा और यमराज के द‌िए हुए वचन के अनुसार भगवान राम ने लक्ष्मण को त्याग द‌िया। दुखी होकर लक्ष्मण ने सरयू नदी में प्रवेश क‌िया और देह त्याग द‌िया।
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इस आदेश से लक्ष्मण जी को हुआ बड़ा दुख

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लक्ष्‍मण्‍ा सीता
देवी सीता को वन में छोड़ने का आदेश राजा रामचंद्र जी ने लक्ष्मण जी को द‌िया। लक्ष्मण यह काम नहीं करना चाहते थे क्योंक‌ि वह देवी सीता को पव‌ित्र और पत‌िव्रता मानते थे और देवी सीता के प्रत‌ि उनके मन में व‌िशेष आदर भाव भी था। लेक‌िन राज जी के आदेश के कारण उन्हें देवी सीता को वन में जाकर छोड़ना पड़ा और वापस लौटकर अयोध्या आना पड़ा।
 
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रामराज्य के 5 ऐसे फैसले ज‌िसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे

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सीता पाताल कुंड
अपने पुत्र लवकुश को अपनाने से पहले भगवान राम देवी सीता को फ‌िर से अपने सतीत्व का प्रमाण देने के ल‌िए कहा। बार-बार सतीत्व पर उठे सवाल से दुखी होकर देवी सीता ने धरती माता से कहा क‌ि वह उन्हें अपनी गोद में समा लें। और देखते ही देखते धरती माता भूम‌ि से प्रकट हुई और देवी सीता उनकी गोद में बैठकर पृथ्वी में समा गई।
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