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ऐसे आया महादेव के पास डमरू? जानें बाकी चीजों से जुड़े कुछ दिलचस्प रहस्य

Sun, 22 Jul 2018 05:08 PM IST
धर्म डेस्क, अमर उजाला
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shiv - फोटो : shiv
28 जुलाई से सावन का महीना शुरू हो रहा है। भगवान शिव का प्रिय सावन का पहला सोमवार 30 जुलाई को है। इस पवित्र महीने में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा आराधना करने पर हर मनोकामना पूरी होती है। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे देवों के महादेव के पास डमरू, त्रिशुल और गले में सांप होने के पीछे के रहस्य....
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शिव - फोटो : self
वैसे तो भगवान शिव को सभी तरह के अस्त्रों को चलाने में महारथ हासिल है, लेकिन शास्त्रों में भगवान शिव का प्रमुख अस्त्र त्रिशुल बताया गया है। इसके पीछे की कहानी बताई जाती है कि जब सृष्टि के आरंभ में ब्रह्मनाद से जब शिव प्रकट हुए तो उनके साथ रज, तम और सत गुण भी प्रकट हुए। यही तीनों गुण मिलकर शिवजी के तीन शूल यानी त्रिशूल बना।
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शिव - फोटो : अमर उजाला
महादेव के दूसरे हाथ में डमरू को लेकर माना जाता है कि सृष्टि के आरंभ में जब सरस्वती उत्पन्न हुई तो वीणा के स्वर से सृष्टि में ध्वनि को जन्म दिया। उस समय भगवान शिव ने नृत्य करते हुए चौदह बार डमरू बजाए और इस ध्वनि से व्याकरण और संगीत के धन्द, ताल का जन्म हुआ। इस तरह से शिवजी के डमरू की उत्पत्ति हुई।

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SHIV PARWATI
देवों के देव के गले में सांप को लेकर पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि यह नागों के राजा नाग वासुकी है। भगवान शिव के वासुकी नाग परम भक्त थे, इसलिए महादेव ने उन्हें अपने गले में आभूषण की तरह हमेशा लिपटे रहने का वरदान दिया।
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शिव पूजा - फोटो : shiv ling
भगवान शिव के सिर पर चंद्रमा को लेकर पुराणों में बताया गया है कि चन्द्रमा ने राजा दक्ष द्वारा मिले श्राप से बचने के लिए महादेव की घोर तपस्या की, जिससे खुश होकर शिवजी ने उनके जीवन की रक्षा की और उन्हें अपने शीश पर धारण किया।
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