फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Somavati Amavasya 2022: इस दिन करें सोमवती अमावस्या व्रत और सुनें ये कथा, मिलेंगे ये सारे शुभ फल

Fri, 13 May 2022 02:58 AM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमरउजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 6
इस साल सोमवती अमावस्या 30 मई 2022, सोमवार को मनाई जाएगी। - फोटो : अमर उजाला।
Somavati Amavasya 2022: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व होता है। सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है। सोमवती अमावस्या वर्ष में लगभग एक अथवा दो ही बार पड़ती है। इस अमावस्या का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व होता है। विवाहित स्त्रियों द्वारा सोमवती अमावस्या के दिन अपने पतियों के दीर्घायु कामना के लिए व्रत का विधान है। इस साल सोमवती अमावस्या 30 मई 2022, सोमवार को मनाई जाएगी। इस सोमवती अमावस्या की विशेष बात यह है कि इस साल सोमवार को पड़ने वाली ये आखिरी अमावस्या है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और पीपल के पेड़ की परिक्रमा करती हैं। इसीलिए शास्त्रों में इसे अश्वत्थ प्रदक्षिणा व्रत की भी संज्ञा दी गयी है। 30 मई को ही वट अमावस्या यानी बरगद अमावस्या भी है। आइए जानते हैं सोमवती अमावस्या की तिथि, महत्व पूजा विधि और कथा के बारे में। 
विज्ञापन

2 of 6
विवाहित स्त्रियों द्वारा सोमवती अमावस्या के दिन अपने पतियों के दीर्घायु कामना के लिए व्रत का विधान है। - फोटो : अमर उजाला
सोमवती अमावस्या तिथि 
अमावस्या तिथि प्रारम्भ - 29 मई, 2022, रविवार, दोपहर 02:54 से 
अमावस्या तिथि समाप्त - 30 मई ,2022, सोमवार, सायं 04:59 पर
विज्ञापन

3 of 6
इस सोमवती अमावस्या की विशेष बात यह है कि इस साल सोमवार को पड़ने वाली ये आखिरी अमावस्या है। - फोटो : अमर उजाला
सोमवती अमावस्या 2022 शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त-  30 मई 2022, सोमवार, प्रातः 04:03  से  प्रातः 04:43 तक 
अभिजित मुहूर्त-30 मई 2022, सोमवार, प्रातः 11:51 से  दोपहर 12:46 तक 
विजय मुहूर्त- 30 मई 2022, सोमवार, दोपहर 02:37 से दोपहर 03:32 तक 
गोधूलि मुहूर्त-30 मई 2022, सोमवार , सायं 07:00 से सायं 07:24 तक 
सर्वार्थ सिद्धि योग- 30 मई 2022, सोमवार, प्रातः 07:12 से  31मई, मंगलवार प्रातः 05:24 तक 

4 of 6
सोमवती अमावस्या के दिन विधि-विधान से पूजा करने और व्रत रखने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है।   - फोटो : अमर उजाला
सोमवती अमावस्या का महत्व 
धार्मिक दृष्टि से प्रत्येक अमावस्या का विशेष महत्व है। सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या इसलिए भी विशेष है क्योंकि इस दिन व्रत-पूजन करने और पितरों के निमित्त तिल देने से पुण्य की प्राप्ति होती है। सोमवार का दिन भगवान शिव और मां पार्वती की आराधना के लिए समर्पित दिन माना जाता है। सोमवती अमावस्या के दिन विधि-विधान से पूजा करने और व्रत रखने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है।  
विज्ञापन

5 of 6
व्रती और सुहागिन महिलाएं पीपल के पेड़/ बरगद के पेड़ की विधि-विधान के साथ पूजा करें। - फोटो : अमर उजाला।
सोमवती अमावस्या  पूजा विधि 
  • सोमवती अमावस्या के दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें।  
  • यदि संभव हो तो किसी तीर्थ स्थान पर स्नान करने जाएं अन्यथा घर में ही स्नान के पानी में गंगाजल मिलकर स्नान करें। 
  • स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद तांबे के कलश में पवित्र जल लेकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।  
  • उसके बाद पितरों के निमित्त तर्पण करें।  
  • इसके बाद व्रती और सुहागिन महिलाएं पीपल के पेड़/ बरगद के पेड़ की विधि-विधान के साथ पूजा करें और परिक्रमा करते हुए दांपत्य जीवन के सुखमय होने की कामना करें। 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
सोमवती अमावस्या से जुड़ी अनेक कथाएं हैं। - फोटो : अमर उजाला।
सोमवती अमावस्या व्रत कथा
वैसे तो सोमवती अमावस्या से जुड़ी अनेक कथाएं हैं लेकिन एक पौराणिक कथा के अनुसार, एक राज्य में एक निर्धन ब्राह्मण रहता था। धन की कमी के कारण उसकी पुत्री का विवाह नहीं हो रहा था। एक दिन ब्राह्मण दंपत्ति ने एक साधु से इसका उपाय पूछा, तो साधु ने बताया कि पास के गांव में एक धोबिन है, जिसका एक बेटा और बहू भी हैं। यदि तुम्हारी बेटी उस धोबिन की सेवा निस्वार्थ भाव से करती है तो धोबिन खुश होकर उसे अपनी मांग का सिंदूर दे देगी, जिससे कन्या का वैधव्य मिट सकता है। ऐसा सुनकर गरीब कन्या अगले दिन ब्रह्म मुहूर्त में उनके घर जाकर सारा काम करने लगी। लेकिन धोबिन या उसकी बहू को नहीं पता था कि यह काम कौन करता है। एक दिन धोबी ने अपनी बहू से पूछा कि तुम इतना सारा काम इतनी जल्दी कैसे कर लेती हो तो बहू बोली मुझे लगा कि आप यह सारा काम करती हैं।  धोबिन ने यह बात सुनकर नजर रखने का विचार किया। उसने सुबह उठकर देखा तो एक कन्या उसके घर का सारा काम कर रही थी और चुपचाप जा रही थी। कई दिनों तक ऐसा होता रहा, एक दिन धोबिन ने उस कन्या के पैर पकड़ लिए और उससे इसका कारण पूछा। इस पर कन्या ने साधु द्वारा कही सारी बात धोबिन को बता दी। धोबिन ने अपनी मांग का सिंदूर उसे दिया। उसी समय धोबिन का पति मर गया। दुखी होकर धोबिन घर से निकल पड़ी और एक पीपल के पेड़ के पास पहुंचकर ईटों के 108 टुकड़े लिए और 108 टुकड़ों को 108 बार परिक्रमा करके एक एक बार फेंकने लगी। ऐसा करने से उसका पति जीवित हो गया। पीपल के पेड़ की परिक्रमा के कारण उसे इसका शुभ फल प्राप्त हुआ। इसलिए मौनी अमावस्या या सोमवती अमावस्या को व्रत करना चाहिए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें