योगी, मुनि और पुराणों की मानें तो मृत्यु का समय करीब आने पर सबसे पहले नाभि चक्र में गतिविधियां शुरु हो जाती हैं
ज्योतिष शास्त्री पंडित जयगोविंद शास्त्री बताते हैं कि भारतीय-योग विज्ञान के अनुसार मनुष्य के शरीर में सात चक्र होते हैं। सहस्रार: शीर्ष चक्र, आज्ञा: ललाट चक्र, विशुद्ध: कंठ चक्र, अनाहत: ह्रदय चक्र, मणिपूर: सौर स्नायुजाल चक्र, स्वाधिष्ठान: त्रिक चक्र, मूलाधार: आधार चक्र जब मनुष्य प्राण त्याग करता है जो इन्हीं चक्रों में से किसी चक्र से आत्मा शरीर से बाहर निकलती है।
योगी, मुनि और पुराणों की मानें तो मृत्यु का समय करीब आने पर सबसे पहले नाभि चक्र में गतिविधियां शुरु हो जाती हैं। नाभि चक्र यानी की मणिपुर ध्यान चक्र टूटने लगता है। नाभि शरीर का केन्द्र स्थान होता है जहां से जन्मकाल में शरीर की रचना शुरू होती है। इसी स्थान से प्राण शरीर से अलग होना शुरू करता है, इसलिए मौत के करीब आने की पहली आहट को नाभि चक्र के पास महसूस किया जा सकता है।
एक दिन में नहीं टूटता है, इसके टूटने की क्रिया लंबे समय तक चलती है और जैसे-जैसे चक्र टूटता जाता है मृत्यु के करीब आने के दूसरे कई लक्षण प्रकट होने लगते हैं।