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shani pradosh vrat: 12 दिसंबर को है शनि प्रदोष व्रत, जानिए इसका महत्व और पूजा विधि

Fri, 11 Dec 2020 05:35 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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एक माह में दो पक्ष होते हैं कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष। दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है। इस तरह से हर माह में दो प्रदोष व्रत आते हैं। प्रदोष व्रत जिस वार को पड़ता है, उसी के अनुसार उसका नाम होता है। इस बार प्रदोष तिथि शनिवार के दिन की हैं, इसलिए यह शनि प्रदोष व्रत कहलाएगा। इस पक्ष का प्रदोष व्रत 12 दिसंबर 2020 यानी कल पड़ रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्रदोष व्रत करने से शिवजी प्रसन्न होते हैं और उनकी असीम कृपा प्राप्त होती है। इस बार प्रदोष व्रत शनिवार को पड़ने के कारण शनि की पीड़ा से मुक्ति पाने के लिए बहुत लाभकारी रहेगा। तो चलिए जानते हैं शनिप्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि...
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भगवान शिव (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
शनि प्रदोष व्रत विधि
  • शनि प्रदोष व्रत के दिन प्रातःकाल उपवास जल्दी उठकर नित्य कर्मों से निवृत्त होकर स्नान करके स्वच्छ धुले हुए वस्त्र धारण करें।
  • उसके बाद शिव मंदिर में जाकर शिव जी का पूजन करें और पूरे दिन निराहार व्रत करें।
  • शनिवार को पर्दोष तिथि पड़ने का कारण इस बार शनिदेव की कृपा भी प्राप्त होगी। इसलिए शनिदेव का भी पूजन करें।
  • पूरे दिन मन ही मन शिव जी के पंचाक्षरी मंत्र का जाप करें।
  'ॐ नम: शिवाय' मंत्र 
 
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शनि प्रदोष व्रत की पूजा विधि
  • प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोषकाल यानि शाम के समय की जाती है। प्रदोष काल की पूजा सूर्यास्त से लगभग पौन घंटे पहले आरंभ कर देनी चाहिए। यह पूजा सूर्यास्त के बाद तक चलती है।
  • जिस स्थान पर आपको पूजन करना हो उसे साफ कर लें और गंगाजल से शुद्ध कर लें।
  • इसके बाद सारी पूजन सामाग्री को एकत्रित करके शिव जी की पूजा आरंभ करें। पूजा के लिए कुश के बने हुए आसन पर बैठे। विधि विधान से शिव जी की पूजा करें और जल अर्पित करते हुए   'ॐ नम: शिवाय' मंत्र का उच्चारण करें। 
  • इसके बाद शिव जी के स्वरूप का ध्यान करते हुए प्रार्थना करें। उसके बाद शनि प्रदोष व्रत की कथा पढ़े या श्रवण (सुनना) करें।
  • जब कथा पूर्ण हो जाए तो हवन सामाग्री मिलाकर 108 बार इस मंत्र का उच्चारण करते हुए अग्नि में आहुति दें। 
 'ॐ ह्रीं क्लीं नम: शिवाय स्वाहा'।
  • पूजा समाप्त होने पर आरती करें और प्रसाद अर्पित करने के बाद सभी को बांटे। 
  •  पूजन करने के बाद अपने व्रत का पारण करें लेकिन ध्यान रहें कि इस दिन भोजन में केवल मीठी चीजों का ही उपयोग करें। नमक का भोजन न करें। 
 

 

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प्रदोष व्रत के दिन शिव जी की कृपा पाने के लिए जपे ये मंत्र
 शिवजी का मूल पंचाक्षरी मंत्र:- ''ॐ नम: शिवाय'' 
 रूद्र गायत्री मंत्र:- ''ॐ तत्पुरुषाय विद्महे, महादेवाय धीमहि, तन्नो रुद्र: प्रचोदयात्''
 महामृत्युंजय मंत्र:- ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
 

 
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शनि प्रदोष व्रत-पूजन का शुभ मुहूर्त 
पूजा का समय शाम को 5 बजकर 25 मिनट से लेकर रात 08 बजकर 09 मिनट तक रहेगा। इस तरह से पूजा करने का समय 2 घंटे 44 मिनट का होगा।
 
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