शनि जयंती 2021
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शनिदेव की जन्म कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार, सूर्य देव का विवाह संज्ञा के साथ हुआ था। लेकिन संज्ञा सूर्य देव के तेज को सहन नहीं कर पाती थीं। जब संज्ञा के लिए सूर्य देव का तेज सहना मुश्किल होने लगा तो संज्ञा अपनी परछाई छाया को सूर्यदेव के पास छोड़ कर चली गईं। इस दौरान सूर्यदेव को भी छाया पर जरा भी संदेह नहीं हुआ। दोनों खुशी-खुशी जीवन व्यतीत करने लगे। जब शनिदेव छाया के गर्भ में थे तो उस समय छाया खूब तपस्या, व्रत-उपवास आदि किया करती थीं। कहते हैं कि उनके अत्यधिक व्रत उपवास करने से शनिदेव का रंग काला हो गया। जब शनि का जन्म हुआ तो सूर्य देव अपनी इस संतान को देखकर हैरान हो गए। उन्होंने शनि के काले रंग को देखकर उसे अपनाने से इनकार कर दिया और छाया पर आरोप लगाया कि यह उनका पुत्र नहीं हो सकता, लाख समझाने पर भी सूर्यदेव नहीं माने। स्वयं और अपनी माता के अपमान के कारण शनि देव सूर्य देव से शत्रु का भाव रखने लगे। आज भी दोनों के बीच शत्रु का भाव है।