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Raksha Bandhan 2025: राखी बांधते समय इन बातों का रखें ध्यान, दिशा और गांठों के लिए है विषेश नियम

Wed, 06 Aug 2025 02:22 PM IST
ज्योति मेहरा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हिंदू संस्कृति में रक्षाबंधन का विशेष महत्व है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं और उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं। राखी बांधते समय कुछ नियमों का पालन करना भी जरूरी होता है, जिससे शुभ परिणाम मिलते हैं।
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Raksha Bandhan 2025 Rules - फोटो : adobe stock
Raksha Bandhan 2025 Rules: हिंदू संस्कृति में रक्षाबंधन का विशेष महत्व है। यह पर्व भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और जिम्मेदारी का प्रतीक होता है। पूरे देश में इस दिन को बड़े उत्साह और प्रेम के साथ मनाया जाता है। राखी के त्योहार में अब बस कुछ ही दिन बचें हैं। लोग पर्व के लिए तैयारियां भी शुरू कर चुके है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं और उनके उज्जवल भविष्य, लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हैं। बदले में भाई उन्हें जीवन भर रक्षा का वचन देते हैं। इसके साथ भी भाई अपनी बहन को इस दिन उपहार भी देते हैं। हालांकि राखी बांधते समय कुछ नियमों का पालन करना भी जरूरी होता है, जिससे शुभ परिणाम मिलते हैं।

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कब है रक्षाबंधन? - फोटो : adobe stock
कब है रक्षाबंधन?
इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व 9 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा। इस दिन कुछ विशेष परंपराओं और नियमों का पालन करना बेहद शुभ माना जाता है, जिससे भाई-बहन के रिश्ते और अधिक मजबूत बनते हैं।

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राखी की तीन गांठों का रहस्य - फोटो : Adobe stock
राखी की तीन गांठों का रहस्य
राखी बांधते समय आमतौर पर तीन गांठें बांधी जाती हैं, और इसके पीछे धार्मिक मान्यता है। इसमें पहली गांठ ब्रह्मा जी को समर्पित मानी जाती है, जो सृष्टि के रचयिता हैं। यह गांठ जीवन में नई शुरुआत और सकारात्मक ऊर्जा लाने का प्रतीक होती है। वहीं दूसरी गांठ भगवान विष्णु को समर्पित होती है, जो सृष्टि के पालनकर्ता हैं। यह भाई की सुरक्षा, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना से जुड़ी होती है, जबकि तीसरी गांठ महादेव यानि शिव जी को समर्पित होती है। यह बुरी शक्तियों से रक्षा और मोक्ष की ओर मार्गदर्शन का प्रतीक मानी जाती है।

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राखी बांधते समय दिशा का महत्व - फोटो : Adobe stock
राखी बांधते समय दिशा का महत्व
राखी बांधते समय दिशा का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। ऐसा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। राखी बांधते समय भाई को पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठाना चाहिए। और बहन का मुख पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए। यह दिशा संयोजन भाई-बहन दोनों के लिए सबसे शुभ माना गया है।

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रक्षाबंधन पर बोलें यह पवित्र मंत्र - फोटो : Adobe stock
रक्षाबंधन पर बोलें यह पवित्र मंत्र
"येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वाम् प्रतिबद्धनामि, रक्षे माचल माचलः।।"


इस मंत्र का अर्थ है "जिस रक्षा सूत्र से महान बलशाली राजा बलि को बांधा गया था, उसी पवित्र सूत्र से मैं तुम्हारी रक्षा हेतु यह धागा बांध रही हूं, जो तुम्हारी हर विपत्ति से रक्षा करेगा।"

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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