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Premanand Ji Maharaj: प्रेमानंद महाराज जी ने बताई भगवान शिव को प्रसन्न करने की विधि, पूरी होगी हर मनोकामना

Sat, 05 Jul 2025 01:55 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

संत प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार भोलेनाथ की पूजा में दिखावटी साधनों की कोई आवश्यकता नहीं होती, उनकी भक्ति सच्चे हृदय और श्रद्धा से की जाए तो भी वे तुरंत प्रसन्न हो जाते हैं। 
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प्रेमानंद महाराज जी ने बताई भगवान शिव को प्रसन्न करने की विधि - फोटो : adobe stock
Premanand Ji Maharaj: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी होता है। इस माह में शिव भक्त सच्चे मन से शिव जी की उपासना करते हैं ताकि वे अपने जीवन से संकटों को दूर कर सकें और अपनी मनोकामनाएं पूरी कर सकें। संत प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार भोलेनाथ की पूजा में दिखावटी साधनों की कोई आवश्यकता नहीं होती, उनकी भक्ति सच्चे हृदय और श्रद्धा से की जाए तो भी वे तुरंत प्रसन्न हो जाते हैं। आइए जानते हैं कि प्रेमानंद महाराज जी ने महादेव को प्रसन्न करने के लिए क्या उपाय बताए हैं।

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शिव जी को प्रसन्न कैसे करें? - फोटो : adobe stock
शिव जी को प्रसन्न कैसे करें?
प्रेमानंद जी बताते हैं कि भगवान शिव अत्यंत सरल स्वभाव और करुणा के प्रतीक हैं। उन्हें प्रसन्न करने के लिए महंगे या भव्य पूजन-सामग्री की जरूरत नहीं होती। भगवान शिव की पूजा चुल्लू पानी चढ़ाकर भी की जा सकती है। वे कहते हैं कि भगवान शिव 'आशुतोष' हैं, यानी थोड़ी-सी भक्ति से भी प्रसन्न हो जाने वाले।

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शिव भक्ति का महत्व - फोटो : adobe stock
शिव भक्ति का महत्व
प्रेमानंद जी एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहते हैं कि भगवान श्रीराम ने अयोध्यावासियों से कहा था कि वे एक राजा के रूप में नहीं, बल्कि एक भक्त के रूप में निवेदन कर रहे हैं, जो भी मेरी भक्ति करना चाहता है, उसके लिए पहले शिव कृपा प्राप्त करना आवश्यक है। शिव की कृपा के बिना कोई भी मेरी शुद्ध भक्ति नहीं कर सकता।

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हरि और हर का संबंध - फोटो : freepik
हरि और हर का संबंध
प्रेमानंद महाराज के अनुसार, 'हरि' (भगवान विष्णु) और 'हर' (भगवान शिव) वास्तव में एक ही सत्ता के दो रूप हैं। उनका मानना है कि जीवन के हर क्षण में, चाहे चलना हो या बैठना, मन में अपने आराध्य का स्मरण करना ही सच्ची साधना है।

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महादेव की कृपा - फोटो : iStock
महादेव की कृपा
भगवान शंकर अत्यंत दयालु हैं और यदि कोई व्यक्ति एकाग्र मन और पूर्ण समर्पण के साथ उनकी भक्ति करता है, तो वे उसके अंतरमन के द्वार खोल देते हैं। प्रेमानंद जी कहते हैं कि सच्चे भाव से की गई शिव आराधना कभी व्यर्थ नहीं जाती, महादेव उस पूजा को अवश्य स्वीकार करते हैं।


 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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