फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Pradosh Vrat 2021: भौम प्रदोष व्रत आज, भगवान शिव और हनुमान जी को प्रसन्न करने के उपाय

Tue, 22 Jun 2021 07:38 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
भौम प्रदोष व्रत 2021 - फोटो : सोशल मीडिया
ज्येष्ठ महीने प्रदोष व्रत 22 जून मंगलवार को रखा जाएगा। मंगलवार के दिन पड़ने के कारण इसे भौम प्रदोष व्रत कहते हैं। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। हिन्दू पंचांग के अनुसार प्रदोष व्रत हर माह कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष व्रत में भगवान शिव के साथ-साथ माता पार्वती की पूजा का विधान है। वहीं भौम प्रदोष व्रत में हनुमान जी की पूजा करने से समस्त प्रकार के संकट दूर हो जाते हैं। भौम से आशय मंगल ग्रह से है और मंगल ग्रह मंगलवार के अधिपति हैं। इसलिए जो कोई जातक भौम प्रदोष व्रत सच्चे मन से रखता है उस जातक की कुंडली में मंगल दोष दूर होता है। मांगलिक दोष को करने का यह उत्तम दिन माना होता है। भौम प्रदोष व्रत के दिन मंगल ग्रह से जुड़े कुछ विशेष उपाय जरूर करने चाहिए। आइए जानते हैं भौम प्रदोष व्रत के उपाय और व्रत विधि।
विज्ञापन

2 of 5
प्रदोष व्रत जून 2021 - फोटो : सोशल मीडिया
भौम प्रदोष व्रत के उपाय
यदि किसी जातक की कुंडली में मंगल दोष है तो उसे भौम प्रदोष व्रत के दिन हनुमान जी को चमेली के तेल में सिंदूर घोलकर चोला चढ़ाना चाहिए। इसके साथ ही सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए और हलवा-पूरी का भोग लगाना चाहिए। यह उपाय करने से मंगल दोष के अशुभ प्रभाव से बचा जा सकता है। यदि कर्ज से मुक्ति चाहते हैं तो इस दिन भगवान शिव को लाल मसूर की दाल अर्पित करना चाहिए। यह उपाय से आपके ऊपर से कर्ज का बोझ उतर जाएगा। संकटों से मुक्ति पाने के लिए इस दिन हनुमान मंदिर में तिकोनी ध्वजा अर्पित करें। 
विज्ञापन

3 of 5
प्रदोष व्रत की विधि - फोटो : सोशल मीडिया
प्रदोष व्रत विधि
व्रत रखने वाले को सुबह जल्दी उठकर शौचादि से निवृत्त होकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद इस व्रत को करने का संकल्प लेना चाहिए। अब स्वच्छ वस्त्र धारण करके भगवान शिव की प्रतिमा को गंगा जल से अभिषेक करना चाहिए। इसके बाद उनकी पूजा करें। शिव आराधना में शिवजी को पुष्प अक्षत्, बेल पत्र, भांग, धतूरा, सफेद चंदन, गाय का दूध, धूप आदि अर्पित करें। पूजा के समय ॐ नम: शिवाय मंत्र का जाप करें। इस दौरान शिव चालीसा का पाठ भी करें और अंत में शिव आरती करके अपनी पूजा को समाप्त करें। भगवान शिव को अपनी इच्छानुसार भोग लगाएं अंत में पूजा का प्रसाद सभी में बांट दें।

4 of 5
प्रदोष व्रत के लाभ  - फोटो : Social media
प्रदोष व्रत के लाभ 
कहा जाता है कि भगवान शिव प्रदोषकाल में कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं। इसलिए इस दिन भगवान शिव की विशेष आराधना की जाती है। उनकी पूजा से भक्तों को उनका आशीर्वाद मिलता है। भक्तों की सभी मनोकामनाओं भी पूर्ण होती हैं। इसके साथ ही इस व्रत का फल व्यक्ति को तमाम कष्टों और दुखों से मुक्त करता है। इस व्रत को संतान कामना के लिए भी रखा जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
प्रदोष व्रत 2021 - फोटो : Facebook/Shree Dwarkadhish Temple
प्रदोष व्रत पूजा समय 
धार्मिक मान्यता है कि (सूर्योदय और सूर्यास्त का समय) का पूजा के लिए शुभ माना जाता है। हालांकि ऐसा भी कहा जाता है कि प्रदोष व्रत में शाम की पूजा का विशेष महत्व होता है।  
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें