बद्रीनाथ से 3 किलोमीटर आगे उत्तराखंड का माणा गांव है। यह स्थान महाभारत का सबसे बड़ा गवाह हैं क्योंकि यहीं पर व्यास मुनि की गुफा है जहां महाभारत ग्रंथ के रचयिता व्यास जी का निवास था। यह स्थान व्यास पोथी के नाम से जाना जाता है। व्यास गुफा के पास ही गणेश गुफा है, कहते हैं इसी गुफा में बैठकर व्यास जी ने गणेश जी से पूरी महाभारत लिखवायी थी।
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महाभारत युद्ध के गवाह हैं यह 10 स्थान, देखें तस्वीरें
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उत्तराखंड का यह है पांडुकेश्वर तीर्थ। कहते हैं राजपाट त्याग कर महाराज पांडु यहीं अपनी दोनों पत्नियों के साथ रहते थे। यहीं पर पांचों पांडवों का जन्म हुआ था।
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यह है कंश का किला। महाभारत के सबसे बड़े नायक भगवान श्री कृष्ण को पैदा होने से रोकने और पैदा होने के बाद हत्या का षड्यंत्र यहीं रचता था कंश।
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उत्तर प्रदेश के बागपत जिले का बरनावा प्राचीन बरनावत माना जाता है। यहीं महाभारत युद्ध का एक बीज बोया गया था। दुर्योधन ने यहीं पर पांडवों को लाक्षागृह में जलाकर मारने की योजना बनाई थी। लेकिन पांडव एक सुरंग से बचकर निकलने में सफल हुए थे। कहते हैं बरनावा के इसी सुरंग से पांडव बच निकले थे।
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इन शतरंज की गोटियों को देखिए यह कोई आम गोटियां नहीं हैं। कहते हैं इनसे भीम अपने पुत्र घटोत्कच के साथ शतरंज खेला करते थे। इन गोटियों को देखने के लिए आपको नागालैंड के दिमापुर जाना होगा। कथा है कि लाक्षागृह से बच निकलने बाद भटकते हुए पांडव वर्तमान नागालैंड पहुंचे थे। यहीं पर भीम और हिडिंबा नाम की राक्षसी का विवाह हुआ था। हिडिंबा से भीम को घटोत्कच नाम का पुत्र प्राप्त हुआ जिसने महाभारत युद्ध में कौरवों की हालत खराब कर दी थी।
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बिहार के राजगृह में स्थित यह है कंश के ससुर और कृष्ण के शत्रु जरासंध का अखाड़ा। कहते हैं यहीं पर भगवान श्री कृष्ण के इशारे पर भीम ने जरासंध का वध किया था।
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यह है मनाली के पिरनी में स्थित अर्जुन गुफा। कहते हैं जुए में राजपाट हार जाने के बाद अर्जुन ने भगवान श्री कृष्ण की सलाह पर यहीं भगवान शिव की तपस्या की थी। यहीं शिव जी ने अर्जुन को पशुपताशस्त्र दिया था।
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उत्तराखंड में जोशीमंड से करीब 2 5 किलोमीटर की दूरी पर हनुमान चट्टी है। यह वह स्थान है जहां भीम की मुलाकात हनुमान जी से हुई थी और हनुमान जी ने महाभारत युद्ध में विजयी होने का आशीर्वाद दिया था।
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महाभारत युद्ध का वह स्थान जिसके बारे में यह कहा जाता है कि यहीं पर भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था।