वैदिक ग्रंथो के अनुसार पूर्वजों द्वारा किए गए कर्मों का फल आने वाली पीढ़ियों को भी मिलता है। उदाहरण के लिए जिस प्रकार पिता का लिया हुआ कर्ज़ संतान को भरना पड़ता है उसी प्रकार यदि पूर्वज अपने जीवन में बुरे कर्मों को कर के चले जाते है तो उसका फल आने वाली पीड़ियों को भोगना पड़ता है। यह तब तक झेलना पड़ता है जब तक की आनी वाली पीढ़ियां पूर्वजो द्वारा किए गए बुरे कर्मों का निवारण न करवाएं। उनकी मुक्ति के लिए श्राद्ध कर्म करने का विधान है। अगर विधि-पूर्वक उनका श्राद्ध कर्म न किया जाए तो जातक पितृ दोष से ग्रस्त हो सकता है। आज हम आपको पितृ दोष से होने वाली परेशानियों से अवगत कराएंगे।
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