'वराह पुराण' में मार्कण्डेयजी गौरमुख ब्राह्मणों से कहते हैं- सभी वेदों को जानने वाले, यज्ञ कर्म करने वाले, भानजे, पौत्र, नाती, ससुर, दामाद, मामा, तपस्वी ब्राह्मण, शिष्य, संबंधी और अपने माता पिता के प्रेमी ब्राह्मणों को श्राद्धकर्म में नियुक्त करना चाहिए।'मनुस्मृति' के अनुसार जो ब्राह्मण क्रोध नहीं करते है सदा प्रसन्न रहते है और परोपकार करते है वो श्राद्ध कर्म के अनुष्ठान के लिए सबसे श्रेष्ठ है।
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