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भगवान शिव को भूलकर भी नहीं चढ़ानी चाहिए ये 7 चीजें, होता है अपशगुन

Sat, 18 Jan 2020 05:59 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
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lord shiva
शिवपुराण के अनुसार, भगवान शिव स्वयंभू हैं। वे देवों के देव महादेव हैं। कैलाश पर्वत उनका निवास स्थान है। गले में लिपटा नाग, मस्तक पर सुशोभित चंद्रमा, जटा में गंगा, हाथ में त्रिशूल और डमरू कुछ ऐसा स्वरूप है भगवान शिव का। शैव मत को मानने वाले भगवान की आराधना करते हैं। भगवान शिव को भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र, नीलकंठ आदि नामों से भी जाना जाता है। कहते हैं जो भक्त शिव की आराधना करते हैं उन्हें समस्त प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिल जाती है। लेकिन उनकी पूजा करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। शिव को ये सात चीजें कभी नहीं चढ़ानी चाहिए।
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भगवान शिव की तीसरी आंख का रहस्य - फोटो : Social media
शंख
भगवान शिव की पूजा में शंख का इस्तेमाल वर्जित माना जाता है। दरअसल भगवान शिव ने शंखचूड़ नाम के असुर का वध किया था, जो भगवान विष्णु का भक्त था शंख को उसी असुर का प्रतीक माना जाता है। इसलिए विष्णु भगवान की पूजा शंख से होती है शिवजी की नहीं।
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lord shiva
तुलसी के पत्ते
तुलसी को हिन्दू धर्म में विशेष महत्व होता है और सभी शुभ कार्यों में इसका प्रयोग होता है, लेकिन तुलसी को भगवान शिव पर चढ़ाना मना है। भूलवश लोग भोलेनाथ की पूजा में तुलसी का इस्तेमाल करते हैं जिस वजह से उनकी पूजा पूर्ण नहीं होती।

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भगवान शिव - फोटो : Social media
नारियल का पानी
शिवलिंग पर नारियल अर्पित किया जाता है लेकिन कभी भी शिवलिंग पर नारियल के पानी से अभिषेक नहीं करना चाहिए। नारियल देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है जिनका संबंध भगवान विष्णु से है इसलिए शिव जी को नहीं चढ़ता।
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भगवान शिव की तीसरी आंख का रहस्य - फोटो : Social media
तिल
तिल को शिवलिंग में चढ़ाना वर्जित माना जाता है क्योंकि यह भगवान विष्णु के मैल से उत्पन्न हुआ माना जाता है इसलिए इसे भगवान शिव को नहीं अर्पित किया जाना चाहिए।
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भगवान शिव - फोटो : Social media
अक्षत
भगवान शिव को अक्षत यानी साबूत चावल अर्पित किए जाने के बारे में शास्त्रों में लिखा है। टूटा हुआ चावल अपूर्ण और अशुद्ध होता है इसलिए यह शिव जी को नही चढ़ता।
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भगवान शिव - फोटो : अमर उजाला
कुमकुम
कुमकुम सौभाग्य का प्रतीक होता है जबकि भगवान शिव वैरागी हैं इसलिए शिव जी को कुमकुम नहीं चढ़ना चाहिए।
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हल्दी
हल्दी का संबंध भगवान विष्णु और सौभाग्य से है इसलिए यह भगवान शिव को नहीं चढ़ता है।
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