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Nag panchami 2020: कैसे हुई नागपंचमी की शुरुआत, जानिए इससे जुड़ी खास बातें

Thu, 23 Jul 2020 06:25 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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नाग पंचमी 2020 - फोटो : अमर उजाला

श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नागपंचमी का पर्व मनाया जाता है। पुराने समय से ही नागों को पूजा की जाती रही है। इसलिए नागपंचमी के दिन नागों की पूजा करने का विधान है। नागपंचमी के दिन वासुकी नाग,तक्षक नाग, शेषनाग आदि की पूजा की जाती है। इस दिन लोग अपने घर के द्वार पर नागों की आकृति भी बनाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इससे नाग देवता की कृपा बनी रहती है। और नाग देवता घर की सुरक्षा करते हैं। इस बार नागपंचमी का त्योहार 25 जुलाई शनिवार के दिन मनाया जाएगा। जानते हैं क्यों मनाई जाती है नागपंचमी क्या है इससे जुड़ी खास बातें..

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kaal

कालसर्प दोष के लिए नागपंचमी का दिन है सर्वोत्तम

जब कुंडली में सारे ग्रह राहु-केतु के बीच में आ जाते हैं तो जातक के कालसर्प दोष लगता है। जिस इंसान की कुंडली में कालसर्प दोष होता है, उसे पारिवारिक जीवन से लेकर व्यापार, नौकरी क्षेत्र में बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। नागपंचमी का दिन कालसर्प दोष के निवारण के लिए सर्वोत्तम माना गया है।

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nag panchami 2020

नागपंचमी के दिन क्यों नहीं करते धरती की खुदाई
पुराणों के अनुसार नागों को पाताल लोक का स्वामी माना गया है। सांपो को क्षेत्रपाल भी कहा जाता है। सांप चूहों आदि से किसान के खेतों की रक्षा करते हैं। साथ ही नाग भूमि में बांबी बना कर रहते हैं इसलिए नागपंचमी के दिन भूलकर भी भूमि की खुदाई नहीं करनी चाहिए।

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sawan 2020
किन चीजों से की जाती है नागों की पूजा

नागपंचमी के दिन नागों की पूजा में पांच तरह की चीजों का उपयोग किया जाता हैं। धान,धान का लावा(जिन्हें खील भी कहा जाता है) दूर्वा, गाय का गोबर और दूध यो पांच चीजें हैं जिनसे नागदेवता की पूजा करते हैं। 
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nag panchami 2020

क्यों मनाया जाता है नागपंचमी का त्योहार

जब अमृत प्राप्त करने के लिए समुद्र मंथन किया गया तो नाग ने माता की आज्ञा नहीं मानी जिसके कारण उसे श्राप मिला कि राजा जनमेजय के यज्ञ में जलकर भस्म हो जाए। श्राप के डर से नाग घबरा गए और ब्रह्माजी की शरण में गए। ब्रह्माजी ने नागों के इस श्राप से बचने के लिए बताया कि जब नागवंश में महात्मा जरत्कारू के पुत्र आस्तिक उत्पन्न होगें। वही आप सभी की रक्षा करेंगे। ब्रह्माजी ने नागो को रक्षा के लिए यह उपाय पंचमी तिथि को बताया था। आस्तिक मुनि ने सावन की पंचमी वाले दिन ही नागों को यज्ञ में जलने से रक्षा की थी। और इनके जलते हुए शरीर पर दूध की धार डालकर इनको शीतलता प्रदान की थी। उसी समय नागों ने आस्तिक मुनि से कहा कि पंचमी को जो भी मेरी पूजा करेगा उसे कभी भी नागदंश का भय नहीं रहेगा। तभी से पंचमी तिथि के दिन नागों की पूजा की जाने लगी।

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