फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mauni Amavasya 2025: आज मौनी अमावस्या के दिन जरूर करें इस चालीसा का पाठ, मिलेगी पितृ दोष से मुक्ति

Wed, 29 Jan 2025 07:24 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Pitra Dosh Upay On Mauni Amavasya:मौनी अमावस्या का दिन पितरों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन पितरों का तर्पण और पिंडदान किया जाता है। इसके अलावा, इस दिन पृत दोष से मुक्ति के उपाय भी किए जाते हैं। यदि आप भी पृत दोष से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो मौनी अमावस्या पर पृत चालीसा का पाठ अवश्य करें।
विज्ञापन
1 of 4
पितृ चालीसा पाठ - फोटो : amar ujala
Mauni Amavasya 2025 Pitra Dosh Ke Upay: आज मौनी अमावस्या है। हिंदू धर्म ग्रंथों में अमावस्या तिथि को अत्यंत शुभ और पवित्र माना गया है। हर महीने एक अमावस्या होती है, जिससे साल में कुल 12 अमावस्या तिथियां आती हैं। माघ माह की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है, और इस दिन स्नान-दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है।  हिंदू धर्म में मौनी अमावस्या का अहम महत्व है। इस दिन सूर्यदेव और पितरों की पूजा के साथ-साथ दान-पुण्य भी बढ़चढ़ कर किया जाता है। इस दिन पितरों के नाम तर्पण करने से उन्हें तृप्ति मिलती है तो इसके साथ ही इस दिन दान करने से कुंडली में मौजूद किसी भी प्रकार के दोष से मुक्ति पाई जा सकती है। 
Mauni Amavasya 2025: जानें मौनी अमावस्या पर मौन व्रत का समय, नियम और महत्व
मौनी अमावस्या पर पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए इस तेल से जलाएं दीपक
Mauni Amavasya 2025: मौनी अमावस्या पर जरूर लगाएं 5 डुबकी, जानें प्रत्येक डुबकी का महत्व और विधि
विज्ञापन

2 of 4
मौनी अमावस्या 2025 पितृ दोष के उपाय - फोटो : amar ujala
पितृ चालीसा का पाठ 
मौनी अमावस्या का दिन पितरों के लिए भी विशेष महत्व रखता है। हिंदू मान्यता के अनुसार, इस दिन पितर धरती पर आते हैं। मौनी अमावस्या पर स्नान, दान और पूजा-पाठ के साथ-साथ पितरों का तर्पण और पिंडदान भी किया जाता है। इस दिन पितृ चालीसा का पाठ करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
विज्ञापन

3 of 4
मौनी अमावस्या 2025 पितृ दोष के उपाय - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कल है मौनी अमावस्या 
माघ महीने की अमावस्या तिथि का आरंभ आज शाम 7 बजकर 35 मिनट पर होगा और इसका समापन 29 जनवरी को शाम 6 बजकर 5 मिनट पर होगा। इस प्रकार, उदयातिथि के अनुसार, मौनी अमावस्या 29 जनवरी को मनाई जाएगी। इस दिन मौनी अमावस्या का व्रत रखा जाएगा और महाकुंभ में भी अमृत स्नान किया जाएगा।
विज्ञापन

4 of 4
पितृ चालीसा पाठ - फोटो : Amar Ujala

पितृ चालीसा

।। दोहा ।।

हे पितरेश्वर आपको दे दो आशीर्वाद,

चरण शीश नवा दियो रख दो सिर पर हाथ।

सबसे पहले गणपत पाछे घर का देव मनावा जी।

हे पितरेश्वर दया राखियो,करियो मन की चाया जी।।

चौपाई

पितरेश्वर करो मार्ग उजागर,

चरण रज की मुक्ति सागर ।

परम उपकार पित्तरेश्वर कीन्हा,

मनुष्य योणि में जन्म दीन्हा ।

मातृ-पितृ देव मन जो भावे,

सोई अमित जीवन फल पावे ।

जै-जै-जै पितर जी साईं,

पितृ ऋण बिन मुक्ति नाहिं ।

चारों ओर प्रताप तुम्हारा,

संकट में तेरा ही सहारा ।

नारायण आधार सृष्टि का,

पित्तरजी अंश उसी दृष्टि का ।

प्रथम पूजन प्रभु आज्ञा सुनाते,

भाग्य द्वार आप ही खुलवाते ।

झुंझुनू में दरबार है साजे,

सब देवों संग आप विराजे ।

प्रसन्न होय मनवांछित फल दीन्हा,

कुपित होय बुद्धि हर लीन्हा ।

पित्तर महिमा सबसे न्यारी,

जिसका गुणगावे नर नारी ।

तीन मण्ड में आप बिराजे,

बसु रुद्र आदित्य में साजे ।

नाथ सकल संपदा तुम्हारी,

मैं सेवक समेत सुत नारी ।

छप्पन भोग नहीं हैं भाते,

शुद्ध जल से ही तृप्त हो जाते ।

तुम्हारे भजन परम हितकारी,

छोटे बड़े सभी अधिकारी ।

भानु उदय संग आप पुजावै,

पांच अँजुलि जल रिझावे ।

ध्वज पताका मण्ड पे है साजे,

अखण्ड ज्योति में आप विराजे ।

सदियों पुरानी ज्योति तुम्हारी,

धन्य हुई जन्म भूमि हमारी ।

शहीद हमारे यहाँ पुजाते,

मातृ भक्ति संदेश सुनाते ।

जगत पित्तरो सिद्धान्त हमारा,

धर्म जाति का नहीं है नारा ।

हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सब पूजे पित्तर भाई ।

हिन्दू वंश वृक्ष है हमारा,

जान से ज्यादा हमको प्यारा ।

गंगा ये मरुप्रदेश की,

पितृ तर्पण अनिवार्य परिवेश की ।

बन्धु छोड़ ना इनके चरणाँ,

इन्हीं की कृपा से मिले प्रभु शरणा ।

चौदस को जागरण करवाते,

अमावस को हम धोक लगाते ।

जात जडूला सभी मनाते,

नान्दीमुख श्राद्ध सभी करवाते ।

धन्य जन्म भूमि का वो फूल है,

जिसे पितृ मण्डल की मिली धूल है ।

श्री पित्तर जी भक्त हितकारी,

सुन लीजे प्रभु अरज हमारी ।

निशिदिन ध्यान धरे जो कोई,

ता सम भक्त और नहीं कोई ।

तुम अनाथ के नाथ सहाई,

दीनन के हो तुम सदा सहाई ।

चारिक वेद प्रभु के साखी,

तुम भक्तन की लज्जा राखी ।

नाम तुम्हारो लेत जो कोई,

ता सम धन्य और नहीं कोई ।

जो तुम्हारे नित पाँव पलोटत,

नवों सिद्धि चरणा में लोटत ।

सिद्धि तुम्हारी सब मंगलकारी,

जो तुम पे जावे बलिहारी ।

जो तुम्हारे चरणा चित्त लावे,

ताकी मुक्ति अवसी हो जावे ।

सत्य भजन तुम्हारो जो गावे,

सो निश्चय चारों फल पावे ।

तुमहिं देव कुलदेव हमारे,

तुम्हीं गुरुदेव प्राण से प्यारे ।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें