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सदियों से जल रही है इन मंदिरों में ज्वाला, क्या है राज?

Sat, 26 Mar 2016 06:42 PM IST
राकेश झा/अमर उजाला, नई दिल्ली
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ज्‍वाला देवी
छोटे हों या बड़े हर मंद‌िर के प्रत‌ि लोगों के मन में आस्‍था और श्रद्ध का भाव रहता है। लेक‌िन कुछ मंद‌िर ऐसे हैं ज‌िनकी कुछ बातें चमत्कारी मानकर दूर-दूर से भक्त चलकर दर्शन के ल‌िए आते हैं। इनमें मंद‌िरों की ज्योत‌ि का बड़ा महत्व है। यहां हम आपको कुछ ऐसे ही मंद‌िरों के बारे में बता रहे हैं ज‌िनमें वर्षों से लगातार अग्न‌ि जल रही हैं। इन द‌िव्य अग्न‌ि के दर्शन करके श्रद्धालु अपने को धन्य मानते हैं।
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सद‌ियों से जल रही है इन मंद‌िरों में अग्न‌ि, इसके पीछे क्या है राज?

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ममलेश्‍वर महादेव
यह ह‌िमाचल प्रदेश के ममलेश्वर महादेव मंद‌िर में स्थ‌ित धुनी ज‌िसे अग्‍न‌ि कुंड भी कहा जाता है। इस मंद‌िर में पांच श‌िवल‌िंग हैं जो पांडवों द्वारा स्‍था‌प‌ित माने जाते हैं। कहते हैं पांच हजार साल पहले यहां पांडव आए थे उस समय पांडवों ने यहां एक अग्न‌ि कुंड जलाई थी। उस समय से ही इस अग्न‌‌िकुंड में न‌िरंतर अग्न‌ि जल रही है। यानी पांडवों के द्वारा जलाई गई अग्न‌ि को आज भी यहां कायम रखा गया है।
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सद‌ियों से जल रही है इन मंद‌िरों में अग्न‌ि, इसके पीछे क्या है राज?

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ज्‍वाला देवी
सबसे पहले हम बात करते हैं ज्वाला देवी की। ज्वाला देवी मंद‌िर में जमीन के अंदर से ज्वाला फूट रही है और इसे देवी का साक्षात् स्वरूप माना जाता है। ऐसी कथा है क‌ि मुगल बादशाह अकबर ने इस ज्वाला को बुझाने की काफी कोश‌िश की लेक‌िन कोश‌िश नाकामयाब रही हैं। अंत में देवी की शक्त‌ि को मानकर अकबर ने देवी को सोने का छत्र चढ़ाया। कहते हैं यह आग माता ने बाबा गोरखनाथ के ल‌िए भोजन बनाने के ल‌िए जलाई थी। लेक‌िन अनाज लाने गोरखनाथ जो गए से लौटकर नहीं आए। इसल‌िए आज भी आग जलाए गोरखनाथ की राह देखती हुई मां यहां व‌िराजमान है।

सद‌ियों से जल रही है इन मंद‌िरों में अग्न‌ि, इसके पीछे क्या है राज?

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हरस‌‌िद्ध‌ि मंद‌‌िर
मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्‍थ‌ित यह है हरस‌िद्ध‌ि माता का मंद‌िर। इस मंद‌िर में 30 अखंड दीप जलते हैं। कहते हैं क‌ि यह दीप 2000 साल से लगातार जल रहे हैं। मान्यता के अनुसार महाराजा व‌िक्रमाद‌ित्‍य का भांजा व‌िजय स‌िंह मां हरस‌िद्ध‌ि का भक्त था। माता ने सपने में इन्हें मंद‌िर बनवाने के ल‌िए कहा। उस समय देवी ने कहा क‌ि तुम मंद‌िर का मुख पूर्व द‌िशा की ओर रखना जैसे ही मंद‌िर में मेरा प्रवेश होगा यह पश्च‌िम द‌िशा की ओर हो जाएगा यही मेरे मंद‌िर में प्रवेश का संकेत होगा। उस समय देवी ने कहा क‌ि महाराजा व‌िक्रमाद‌ित्‍य मंद‌िर में दीप जलाएंगे। राजा व‌िजय स‌िंह ने कहा क‌ि दीप तो कुछ समय बाद बुझ जाएगा। देवी ने कहा क‌ि यह दीप अखंड होगा हवा भी इसे बुझा नहीं पाएगी। हर द‌िन दीप में तेल भरा जाता है और यह न‌िरंतर जलता रहता है। 
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राधा रमण मंद‌िर
वृंदावन के श्री राधारमण मंद‌िर में जलते इस अखंड लौ  के दर्शन कीज‌िए। कहते हैं यह लौ तम‌िलनाडु के श्रीरंगपट्टनम स्‍थ‌ित श्रीरंगम् मंद‌िर से वृंदावन आई है। चैतन्य महाप्रभु के भक्त श्री गोपाल भट्ट जी इसे करीब 500 साल पहले लेकर आए थे। उस समय से यह लौ कभी बुझी नहीं है। इसी से मंद‌िर के दीप जलाए जाते हैं और भगवान के ल‌िए भोग भी बनाए जाते हैं। लौ नहीं बुझे इसके ल‌िए भोग बनाने के बाद कुछ लकड़‌ियां इसमें डाल कर ढक दी जाती है ताक‌ि अंदर अंदर अग्न‌ि सुलगती रहे।
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कामख्‍या
असम में स्‍थ‌ित‌ि तंत्रपीठ कामख्या मंद‌िर में भी एक द‌‌िव्य लौ जलती है ज‌िसे प्राकृत‌िक कहा जाता है। मंद‌िर के अंद‌र आपको अंधकार में एक धीमी लौ जलती नजर आएगी इस लौ के दर्शन को देवी के दर्शन के समान माना जाता है।
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सद‌ियों से जल रही है इन मंद‌िरों में ज्‍वाला, क्या है राज?

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श‌िव पार्वती व‌िवाह अग्न‌िकुंड
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के त्रिर्युगी नारायण गांव में एक मंद‌िर है ज‌िसे त्रिर्युगी नारायण मंद‌िर के नाम से जाना जाता है। इस मंद‌िर में एक अग्न‌िकुंड है ज‌िसे भगवान श‌िव और पार्वती के व‌िवाह के ल‌िए प्रज्जवल‌ित अग्न‌ि कुंड के रूप में जाना जाता है। मान्यता है क‌ि यह कुंड सतयुग से जल रहा है इसल‌िए यह त्रिर्युगी अग्न‌िकुंड भी कहलाता है। इस कुंड की अग्न‌ि का अखंड रखने के ल‌िए इसमें हमेशा लकड़‌ियां डाली जाती रहती हैं। प्राचीन काल में हवन और यज्ञ के ल‌िए लोग इस कुंड से अग्न‌ि ले जाया करते थे। आज भी श्रद्धालु इस कुंड के दर्शन करते हैं और इसकी राख अपने साथ ले जाते हैं। मान्यता है क‌ि इस कुंड की राख वैवाह‌िक जीवन को सुखमय बनाने में सहायक होती है। 
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