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Krishna Janamasthami 2019: पांच हजार साल पहले कृष्ण के जन्म पर हुई थी ये अनोखी घटना

Sat, 17 Aug 2019 10:39 AM IST
प्रशांत राय धर्म डेस्क, अमर उजाला
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- फोटो : social media
हर साल भगवान कृष्ण का जन्मदिन जन्माष्टमी के तौर पर पूरे देश में मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि श्रीकृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसलिए प्रतिवर्ष भाद्र माह की अष्टमी को जन्माष्टमी मनाई जाती है। ऐसा कहा जाता है कि भगवान कृष्ण का जन्म पांच हजार साल पहले आधी रात को हुआ था। इसलिए आधी रात के बाद ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद पूजा की जाती है। इस दिन व्रत अष्टमी तिथि से शुरू होती है और अगले दिन खत्म होती है। 
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भगवान कृष्ण - फोटो : Social media
स्कंद पुराण के मुताबिक द्वापरयुग में मथुरा में महाराजा उग्रसेन राज करते थे। हालांकि उनके बेटे कंस ने अपने पिता को सिंहासन से हटा दिया और खुद राजा बन गया। कंस का अत्याचार हर रोज बढ़ता जा रहा था। कंस की एक बहन देवकी थी, जिसकी शादी वासुदेव से हुआ। कंस अपनी बहन से बहुत प्रेम करता था। वह खुद उसे ससुराल छोड़ने जाता था। एक दिन जब कंस अपनी बहन को ससुराल छोड़कर घर वापस जा रहा था। तभी बीच सड़क पर आकाशवाणी हुई कि हे कंस जिसे तू इतने प्रेम से विदा कर रहा है उसकी आंठवां पुत्र तेरा काल बनेगा। यह आकाशवाणी सुन कंस गुस्सा हो गया और उसने देवकी और वासुदेव को बंधक बना लिया। 
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भगवान कृष्ण - फोटो : Social media
कंस ने सोचा कि अगर वह देवकी के हर बेटे को मारता गया तो वह अपने काल को हराने में सफल होता गया। उसने यही शुरू किया। देवकी का जैसे ही कोई संतान होता वह उसे पटककर मार देता। सात पुत्रों को जन्म देने के बाद देवकी के 8वें पुत्र के जन्म की बारी आई। कंस इस बात को जानता था और इसलिए उसने सुरक्षा और कड़ी कर दी। हालांकि इस बार कंस की सारी योजनाएं धरी की धरी रह गईं। कृष्ण का जैसे ही जन्म हुआ कमरे में चारो तरफ रोशनी छा गई। उसी वक्त नंदगांव में यशोदा के पेट से एक बेटी का जन्म हुआ। कृष्ण का जन्म होते ही उनके पिता वासुदेव के हाथ-पैर में बंधी सारी बेड़ियां अपने आप खुल गईं। कारागार के सभी दरवाजे खुल गये और कारागार में मौजूद पहरेदारों को नींद आ गई। इसके बाद वासुदेव ने एक टोकरी में नवजात शिशु को रखा और नंद गांव की ओर चल पड़े। 

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भगवान कृष्ण - फोटो : Social media
वासुदेव जब यमुना किनारे पहुंचे तो नदी ने भी उन्हें रास्ता दे दिया। पूरे मथुरा में इस समय तेज बारिश हो रही थी ऐसे में शेषनाग स्वयं शिशु के लिए छतरी बनकर वासुदेव के पीछे-पीछे चलने लगे। वासुदेव यमुना पार कर नंदगांव पहुंचे और यशोदा के साथ कृष्ण को सुला दिया और स्वयं कन्या को लेकर मथुरा गये। यह कन्या दरअसल माया का एक रूप थी। वासुदेव जैसे ही कारागार पहुंचे, सबकुछ सामान्य और पहले की तरह हो गया। कंस को आठवें संतान के जन्म की खबर पहरेदारों से मिली तो वह उसे मारने वहां आ पहुंचा। कंस ने कन्या को अपने गोद में लिया और एक पत्थर पर पटकने की कोशिश की। हालांकि, इससे पहले ही वह कन्या आकाश में उड़ गई और माया का रूप ले लिया। साथ ही उसने कहा, 'अरे मूर्ख, मुझे मारने से क्या होगा? तुझे मारने वाला तो पहले ही कहीं और सुरक्षित पहुंच चुका है।' 
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भगवान कृष्ण - फोटो : Social media
यह सुनकर कंस बेहद क्रोधित हुआ और कृष्ण की खोज शुरू कर दी। कंस को जब कृष्ण के नंदगांव में होने की बात पता चली तो उसने कई बार उन्हें मारने का प्रयास किया लेकिन असफल रहा। आखिर में श्रीकृष्ण ने युवावस्था में कंस का वध किया राजा उग्रसेन समेत अपने माता-पिता को कारागार से बाहर निकाला।
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