रावण और पुरा महादेव की कथा
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रावण और पुरा महादेव की कथा
पुराणों में वर्णित एक कथा के अनुसार समुद्र मंथन से निकले विष को पीने के बाद जब भगवान शिव का कंठ नीला हो गया, तब रावण ने उनकी आराधना की। वह कांवड़ में जल भरकर 'पुरा महादेव' पहुंचा और शिवजी का जलाभिषेक किया। कहा जाता है कि इससे शिवजी विष के प्रभाव से मुक्त हुए, और यहीं से कांवड़ यात्रा की परंपरा प्रारंभ हुई।