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April Kalashtami 2025 Mantra: कालाष्टमी पर पाएं काल भैरव की कृपा, इन चमत्कारी मंत्रों से होगा हर भय का नाश

Fri, 18 Apr 2025 11:55 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Kalashtami Puja Mantras: इस बार कालाष्टमी पर सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है, जो इसे और भी प्रभावशाली बनाता है। यह शुभ योग 20 अप्रैल को दोपहर 11:48 बजे से शुरू होकर 21 अप्रैल की सुबह 5:49 बजे तक रहेगा। 
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काल भैरव पूजा - फोटो : अमर उजाला
Kalashtami Mantra Chanting: अप्रैल महीने की कालाष्टमी व्रत तिथि इस बार 20 अप्रैल, रविवार को आ रही है, जो कि विशेष रूप से शुभ मानी जा रही है। इस दिन भक्तजन काल भैरव की पूजा करते हैं, जो भगवान शिव का रौद्र और रक्षक स्वरूप हैं। मान्यता है कि काल भैरव की उपासना से अकाल मृत्यु, भय, रोग और शत्रुओं का नाश होता है।
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इस बार कालाष्टमी पर सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है, जो इसे और भी प्रभावशाली बनाता है। यह शुभ योग 20 अप्रैल को दोपहर 11:48 बजे से शुरू होकर 21 अप्रैल की सुबह 5:49 बजे तक रहेगा। इस योग में किए गए कार्य सिद्धि की ओर अग्रसर होते हैं, इसलिए व्रत, पूजा और मंत्र जाप के लिए यह समय अत्यंत लाभकारी रहेगा।
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निशिता काल, जो कि तंत्र-साधना और मंत्र सिद्धि का श्रेष्ठ मुहूर्त माना जाता है, 20 अप्रैल को रात 11:58 से 12:42 तक रहेगा। इस दौरान काल भैरव के बीज मंत्र, तांत्रिक मंत्र या भैरवाष्टक का पाठ करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है। जो भी व्यक्ति श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत करता है, उसे जीवन में निर्भयता, सुरक्षा और सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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काल भैरव पूजा - फोटो : अमर उजाला
अप्रैल कालाष्टमी व्रत 2025 पूजा मंत्र
  • ॐ  शिवगणाय विद्महे गौरीसुताय धीमहि तन्नो भैरव प्रचोदयात।।
  • ॐ  कालभैरवाय नम:
  • ॐ  भ्रां कालभैरवाय फट्
धर्मध्वजं शङ्कररूपमेकं शरण्यमित्थं भुवनेषु सिद्धम्।
द्विजेन्द्र पूज्यं विमलं त्रिनेत्रं श्री भैरवं तं शरणं प्रपद्ये।।
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काल भैरव पूजा - फोटो : Amar Ujala
भय, ग्रह दोष और रोग मुक्ति के लिए काल भैरव मंत्र
ॐ  ऐं क्लीं क्लीं क्लूं स: वं ह्रां ह्रीं ह्रूं आपदउद्धारणाय अजामल बद्धाय लोकेश्वराय स्वर्ण शांति धन धान्य आकर्षणाय सर्व ऋण रोगादि निवारणाय ह्रीं ओम कालभैरवाय नम:
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काल भैरव पूजा - फोटो : अमर उजाला
काल भैरवाष्टक पाठ
ॐ देवराजसेव्यमानपावनाङ्घ्रिपङ्कजं,
व्यालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं कृपाकरम्।
नारदादियोगिवृन्दवन्दितं दिगंबरं,
काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥॥

भानुकोटिभास्वरं भवाब्धितारकं परं,
नीलकण्ठमीप्सितार्थदायकं त्रिलोचनम्।
कालकालमंबुजाक्षमक्षशूलमक्षरं,
काशिका पुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥॥

शूलटङ्कपाशदण्डपाणिमादिकारणं,
श्यामकायमादिदेवमक्षरं निरामयम्।
भीमविक्रमं प्रभुं विचित्रताण्डवप्रियं
काशिका पुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥॥

भुक्तिमुक्तिदायकं प्रशस्तचारुविग्रहं
भक्तवत्सलं स्थितं समस्तलोकविग्रहम्।
विनिक्वणन्मनोज्ञहेमकिङ्किणीलसत्कटिं
काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे॥॥

धर्मसेतुपालकं त्वधर्ममार्गनाशकं
कर्मपाशमोचकं सुशर्मदायकं विभुम्।
स्वर्णवर्णशेषपाशशोभिताङ्गमण्डलं
काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे॥॥

रत्नपादुकाप्रभाभिरामपादयुग्मकं
नित्यमद्वितीयमिष्टदैवतं निरञ्जनम्।
मृत्युदर्पनाशनं कराळदंष्ट्रमोक्षणं
काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे॥॥

अट्टहासभिन्नपद्मजाण्डकोशसन्ततिं
दृष्टिपातनष्टपापजालमुग्रशासनम्।
अष्टसिद्धिदायकं कपालमालिकन्धरं
काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे॥॥

भूतसङ्घनायकं विशालकीर्तिदायकं
काशिवासलोकपुण्यपापशोधकं विभुम्।
नीतिमार्गकोविदं पुरातनं जगत्पतिं
काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे॥॥

कालभैरवाष्टकं पठन्ति ये मनोहरं
ज्ञानमुक्तिसाधनं विचित्रपुण्यवर्धनम्।
शोकमोहदैन्यलोभकोपतापनाशनं ते
प्रयान्ति कालभैरवाङ्घ्रिसन्निधिं ध्रुवम्॥॥

॥इति श्रीमच्छङ्कराचार्यविरचितं कालभैरवाष्टकं संपूर्णम्॥
 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।


 
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