hanuman ji
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हनुमान जी का वायु चक्र बनाना
हनुमान जी ने पवन देव को यह समस्या बताई। पवन देव ने कहा कि हवा को पूरी तरह से रोकना संभव नहीं, लेकिन एक उपाय है। उन्होंने हनुमान जी को निर्देश दिया कि वे मंदिर के चारों ओर तेजी से चक्कर लगाएं। इस गति से हवा का एक चक्र बनेगा, जो सामान्य हवा को मंदिर के अंदर जाने से रोक देगा। इस वायु चक्र की वजह से मंदिर के अंदर समुद्र की लहरों की आवाज नहीं पहुंच पाती, जिससे भगवान विष्णु को शांति मिलती है।
इस प्रसंग के बाद श्री भगवान जगन्नाथ आराम से विश्राम करने लगे। मान्यता है कि इसके बाद से मंदिर के शिखर पर लगा ध्वज हमेशा हवा की सामान्य दिशा के विपरीत लहराता है। ऐसा कहा जाता है कि यह चमत्कार हनुमान जी द्वारा मंदिर की विपरीत दिशा में परिक्रमा करने के कारण हुआ।
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