भारत की सबसे प्राचीन सभ्यता का नाम है सिंधु घाटी की सभ्यता। इस सभ्यता के दो प्रमुख नगर थे हड़प्पा और मोहनजोदाडो। ये दोनों प्रमुख नगर आज पाकिस्तान में मौजूद हैं जहां भगवान शिव की पूजा के अवशेष मिलते हैं। लेकिन इतिहास का सबसे बड़ा सच यह है कि जो पाकिस्तान आज हिंदू धर्म को अपना शत्रु मानता है और मंदिरों को ढाहने से हिचकता नहीं है वही पाकिस्तान कभी हिंदू धर्म का सबसे बड़ा गढ़ था। यहीं से भगवान शिव से जुड़ी 5 ऐसी बातें सामने निकलकर आयी हैं जिस पर हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले आज भी हृदय से विश्वास करते हैं।
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भगवान शिव की यह पांच बातें जिसे पाकिस्तान में शुरु हुआ मानते हैं
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पश्ाुपति शिव
भगवान शिव का सबसे प्राचीन स्वरूप पशुपति का माना जाता है। पशुपति यानी पशुओं के रक्षक। महोनजोदाडो से मिले मुहरों में एक योगी पुरुष दिखता है जिनके आस पास हिरण, बकरी, हाथी, शेर बैठा हुआ है। माना जाता है कि यह योगी पुरुष पशुपति हैं। पुराणों में भी भगवान शिव का ऐसा ही स्वरूप बताया गया है। इस बात से यह साबित होता है कि उन दिनों लोग भगवान शिव के योगी स्वरूप को जानते थे और पशुपति रूप में उनकी पूजा करते थे। हरप्पा और मोहनजोदाडो की इस मान्यता को आज भी हर हिंदू मानता और पूजता है।
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भगवान शिव की यह पांच बातें जिसे पाकिस्तान में शुरु हुआ मानते हैं
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शिवलिंग
सैंधव सभ्यता के लोग प्रकृति और पुरुष के मिलन को सृष्टि का आधार मानते थे। इसलिए लिंग और भग यानी योनी की पूजा करते थे। आज भी भगवान शिव की पूजा लिंग रूप में की जाती है। लिंग पुराण में शिव लिंग के नीचे भग यानी योनी भाग के होने की जो कथा है उस बात से भी संभवतः सैंधव सभ्यता के लोग वाकिफ थे। इसलिए सैंधव काल के शिवलिंग में भी भग देखने को मिलता है। और अगर कहा जाय कि शिवलिंग की पूजा सिंधु सभ्यता की देन है तो यह भी गलत नहीं होगा।
भगवान शिव की यह पांच बातें जिसे पाकिस्तान में शुरु हुआ मानते हैं
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नंदी
भगवान शिव के साथ नंदी और नाग की पूजा हर शिव भक्त करता है। नाग और नंदी की पूजा की पहली झलक सिंधु सभ्यता में मिलती है। यहां के मुहरों में कुबड़ वाले बैल और नाग की तस्वीर भी खूब मिलती है। पशुपति के साथ भी नाग की तस्वीर मिलती है जो दर्शाता है कि सिंधु सभ्यता से ही शिव के साथ नाग और नंदी जुड़े हुए हैं।
भगवान शिव की यह पांच बातें जिसे पाकिस्तान में शुरु हुआ मानते हैं
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सिंधु सभ्यता
सिंधु सभ्यता के लोग भूत-प्रेत, तंत्र मंत्र में काफी विश्वास करते थे। इस सभ्यता के लोग देवी की उपासना करते थे और भगवान शिव के योगी रूप की भी पूजा करते थे। आज भी लोग भगवान शिव और देवी की पूजा तंत्र-मंत्र की सिद्धि के लिए करते हैं। माना जाता है कि इस आस्था और मान्यता की शुरुआत भी मोहनजोदाडो और हरप्पा से हुई।