हरितालिका तीज पूजन एवं विसर्जन विधि
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2. कलश स्थापना हेतु 'सर्वोषधि'
शास्त्रों के अनुसार पूजन कलश में सर्वोषधि डालना अनिवार्य माना गया है। वनस्पति शास्त्र की जिन 10 औषधियों को शास्त्रों ने 'सर्वोषधि' की मान्यता दी है, वे इस प्रकार हैं:- मुरा, जटामांसी, वच, कुष्ठ, शिलाजीत, हल्दी, दारूहल्दी, सठी, चंपक, मुस्ता
3. षोडश पत्र (16 विशेष पत्तियां) और उनका धार्मिक महत्व
भगवान शिव एवं माता पार्वती को 16 विशेष पत्र अर्पित करने का विधान है। ध्यान रहे कि पूजन में पत्तियां हमेशा उल्टी और फूल-फल सीधे चढ़ाए जाते हैं:
बिल्वपत्र: अखंड सौभाग्य की प्राप्ति
जातीपत्र (चमेली): उत्तम संतान सुख
सेवंतिका: दांपत्य जीवन में मधुरता
बांस के पत्ते: वंश वृद्धि और निरोगता
देवदार पत्र: ऐश्वर्य और कीर्ति
चंपा पत्र: सौंदर्य व उत्तम स्वास्थ्य
कनेर पत्र: यश तथा मानसिक शांति
अगस्त्य पत्र: वैभव एवं समृद्धि
भृंगराज: साहस व पराक्रम
धतूरा पत्र: मोक्ष एवं बंधनों से मुक्ति
आम के पत्ते: मांगलिक कार्यों में सिद्धि
नीम के पत्ते: चरित्र निर्मलता व शुद्धि
अशोक के पत्ते: कष्ट निवारण व शांत जीवन
पान के पत्ते: परस्पर प्रेम व प्रगाढ़ता
केले के पत्ते: कार्य में पूर्ण सफलता
शमी के पत्ते: धन-धान्य और अक्षय समृद्धि