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Guruwar Niyam: गुरुवार को क्यों नहीं धोने चाहिए बाल ? जानें इससे जुड़ी मान्यताएं

Wed, 22 Apr 2026 03:41 PM IST
Megha Kumari ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

Guruwar Ko Bal Kyon Nahi Dhona Chahiye: आपने अक्सर लोगों को गुरुवार को बाल धोने से मना करते हुए सुना होगा। लेकिन क्या आप इसके पीछे का कारण जानते हैं ? 
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Guruwar Ko Bal Kyon Nahi Dhona Chahiye - फोटो : अमर उजाला
Guruwar Ko Bal Kyon Nahi Dhona Chahiye: सप्ताह के सभी दिनों का अपना अलग महत्व होता है। इनमें गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की पूजा-अर्चना के लिए उत्तम माना जाता है। मान्यता है कि, इस दिन विधि-विधान से उपासना-उपवास करने से व्यक्ति का भाग्योदय होता है। साथ ही ज्ञान वृद्धि के योग भी बनते हैं। इसके अलावा कुंडली में गुरु का स्थान मजबूत बनता है, जिसके प्रभाव से विवाह के योग का निर्माण होता है। वहीं गुरुवार जहां पूजा-पाठ के लिए उत्तम हैं, वहीं इस दिन भूलकर भी बाल नहीं धोने चाहिए। लेकिन क्या आप जानते हैं कि, आखिर गुरुवार को बाल क्यों नहीं धोने चाहिए ? अगर नहीं तो आइए जानते हैं।

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Guruwar Ko Bal Kyon Nahi Dhona Chahiye - फोटो : Adobe stock
क्या कहती हैं मान्यताएं ?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुरुवार देव गुरु बृहस्पति का दिन है, जिन्हें सबसे शुभ ग्रह माना जाता है। ऐसे में गुरुवार के दिन बाल धोने व काटने से बृहस्पति की सकारात्मक ऊर्जा कमजोर हो सकती है। इसके अलावा गुरुवार को बाल धोने से घर की सुख-समृद्धि पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।
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Guruwar Ko Bal Kyon Nahi Dhona Chahiye - फोटो : Adobe stock
कहते हैं कि, गुरुवार को नाखून भी नहीं काटने चाहिए। इससे घर की बरकत कम हो सकती हैं। साथ ही कार्यों में रुकावटें आती हैं। वहीं कुछ मान्यता ऐसी भी हैं कि, गुरुवार के दिन बाल धोने से पति के करियर और प्रगति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए कई घरों में महिलाएं इस दिन बाल धोने से बचती हैं और पूजा-पाठ पर अधिक ध्यान देती हैं।

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Guruwar Ko Bal Kyon Nahi Dhona Chahiye - फोटो : adobe
गुरुवार को करें यह काम
गुरुवार को देवगुरु बृहस्पति की आरती करने से कुंडली में गुरु का स्थान मजबूत होता है। साथ ही व्यक्ति के धन-धान्य में वृद्धि, विवाह-संतान से जुड़ी समस्याएं दूर और भाग्य का पूरा साथ मिलता है।

बृहस्पति देव आरती 

जय बृहस्पति देवा,
ॐ जय बृहस्पति देवा ।
छिन छिन भोग लगाऊँ,
कदली फल मेवा ॥
ॐ जय बृहस्पति देवा,
जय बृहस्पति देवा ॥

तुम पूरण परमात्मा,
तुम अन्तर्यामी ।
जगतपिता जगदीश्वर,
तुम सबके स्वामी ॥
ॐ  जय बृहस्पति देवा,
जय बृहस्पति देवा ॥

चरणामृत निज निर्मल,
सब पातक हर्ता ।
सकल मनोरथ दायक,
कृपा करो भर्ता ॥
ॐ जय बृहस्पति देवा,
जय बृहस्पति देवा ॥

तन, मन, धन अर्पण कर,
जो जन शरण पड़े ।
प्रभु प्रकट तब होकर,
आकर द्वार खड़े ॥
ॐ जय बृहस्पति देवा,
जय बृहस्पति देवा ॥

दीनदयाल दयानिधि,
भक्तन हितकारी ।
पाप दोष सब हर्ता,
भव बंधन हारी ॥
ॐ जय बृहस्पति देवा,
जय बृहस्पति देवा ॥

सकल मनोरथ दायक,
सब संशय हारो ।
विषय विकार मिटाओ,
संतन सुखकारी ॥
ॐ जय बृहस्पति देवा,
जय बृहस्पति देवा ॥

जो कोई आरती तेरी,
प्रेम सहित गावे ।
जेठानन्द आनन्दकर,
सो निश्चय पावे ॥
ॐ जय बृहस्पति देवा,
जय बृहस्पति देवा ॥

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण):
 यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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