गरुड़ पुराण हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथों में से एक है। इस ग्रंथ का संबंध भगवान विष्णु से है। इसे 18 महापुराणों में से एक माना जाता है। इसमें उन बातों का उल्लेख किया गया है, जिनका संबंध किसी दूसरे आयाम से है। जैसे मृत्यु के बाद हमारी आत्मा के साथ क्या होता है? श्राद्ध और पिंडदान करते वक्त क्या किया जाना चाहिए? और क्या नहीं किया जाना चाहिए? इन सब बातों का विस्तृत जिक्र हमें इसमें देखने को मिलता है। श्राद्ध और पिंडदान का हमारे धर्म में एक खास महत्व है। मान्यता है कि मृत्यु के बाद जिन लोगों का श्राद्ध और पिंडदान नहीं किया जाता है, उनको दूसरे लोकों में काफी ज्यादा कष्ट और दुखों का सामना करना पड़ता है।
हिंदू धर्म में लंबे समय से ये परंपरा चलती आ रही है कि श्राद्ध और पिंडदान पुरुषों के द्वारा ही किया जाता है। कई लोगों का मानना है कि ये काम महिलाएं नहीं कर सकती हैं, पर ये गलत जानकारी है। कुछ विशेष स्थितियों में महिलाएं भी श्राद्ध और पिंडदान कर सकती हैं। इसी कड़ी में आइए जानते हैं कि किन-किन परिस्थितियों में महिलाएं भी श्राद्ध और पिंडदान कर सकती हैं, जिनका उल्लेख गरुड़ पुराण में किया गया है।