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Mangla Gauri Vrat 2022: सावन का पहला मंगला गौरी व्रत आज, जानिए पूजा विधि, महत्व और कथा

Tue, 19 Jul 2022 01:18 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजला, नई दिल्ली
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सावन के पहले मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि, महत्व और कथा - फोटो : pinterest
Mangla Gauri Vrat 2022: हिंदू धर्म में सावन माह को बेहद शुभ माना गया है। इस पूरे माह में विधि-विधान से भगवान भोलेनाथ की पूजा की जाती है। इस माह के सोमवार शिव पूजा के लिए बेहद शुभ माने गए हैं। सावन माह में प्रत्येक सोमवार को व्रत करने का जितना महत्व होता है, उतना ही महत्व मंगलवार को व्रत करने का भी होता है। भगवान भोलेनाथ की तरह मां गौरी को भी सावन का महीना बहुत प्रिय होता है। इस माह में प्रत्येक मंगलवार को व्रत किया जाता है। जिसे मंगला गौरी व्रत के नाम से जाना जाता है। सावन माह का पहला मंगला गौरी व्रत 19 जुलाई को है। इस दिन मां गौरी की विशेष पूजा-आराधना की जाती है। ये व्रत महिलाएं अखंड सौभाग्यवती की कामना के लिए करती हैं। धर्म शास्त्रों में इस व्रत को करने के लिए विशेष नियम बताए गए हैं। आइए जानते हैं मंगला गौरी व्रत का महत्व, कथा और पूजा विधि... 
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सावन के पहले मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि, महत्व और कथा - फोटो : pixabay
प्रथम मंगला गौरी व्रत
इस साल सावन माह में प्रथम मंगला गौरी व्रत 19 जुलाई 2022 को रखा जाएगा। इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से मां गौरी की विशेष कृपा प्राप्त होगी।
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सावन के पहले मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि, महत्व और कथा - फोटो : iStock
मंगला गौरी व्रत और पूजा विधि
मंगला गौरी व्रत वाले दिन सूर्योदय से पहले उठें, स्नानादि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद साफ लकड़ी की चौकी पर लाल रंग का वस्त्र बिछाएं।

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सावन के पहले मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि, महत्व और कथा - फोटो : iStock
चौकी पर मां गौरी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। मां के समक्ष व्रत का संकल्प करें व आटे से बना हुआ दीपक प्रज्वलित करें। इसके बाद धूप, नैवेद्य फल-फूल आदि से मां गौरी का पूजन करें। पूजा पूर्ण होने पर मां गौरी की आरती करें और उनसे प्रार्थना करें।
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सावन के पहले मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि, महत्व और कथा - फोटो : iStock
मंगलागौरी व्रत का महत्व
धर्म शास्त्रों के अनुसार, मंगला गौरी व्रत वाले दिन विधि पूर्वक मां गौरी की पूजा करने से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है व दांपत्य जीवन में अथाह प्रेम बना रहता है। 
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सावन के पहले मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि, महत्व और कथा - फोटो : iStock
इस दिन व्रत करने से आपके दांपत्य जीवन के साथ ही पूरे घर में भी सुख-शांति बनी रहती है। संतान प्राप्ति की कामना रखने वाली स्त्रियों के लिए भी यह व्रत बहुत शुभफलदायी रहता है।
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सावन के पहले मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि, महत्व और कथा - फोटो : istock
यदि किसी के दांपत्य जीवन में समस्याएं बनी हुई हैं तो उन्हें मंगला गौरी व्रत करना चाहिए। इससे दांपत्य जीवन का कलह-कष्ट व अन्य सभी समस्याएं दूर होती है। इस व्रत को पूरी श्रद्धा भावना के साथ करना चाहिए।
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सावन के पहले मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि, महत्व और कथा - फोटो : iStock
मंगला गौरी व्रत की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक शहर में धरमपाल नाम का एक व्यापारी रहता था। उसकी पत्नी बहुत खूबसूरत थी और उसके पास धन संपत्ति की भी कोई कमी नहीं थी लेकिन संतान न होने के कारण वे दोनों बहुत ही दु:खी रहा करते थे। कुछ समय के बाद ईश्वर की कृपा से उनको एक पुत्र की प्राप्ति हुई परंतु वह अल्पायु था। उसे श्राप मिला था कि 16 वर्ष की आयु में सर्प के काटने से उसकी मृत्यु हो जाएगी। संयोग से उसकी शादी 16 वर्ष की आयु पूर्ण होने से पहले ही हो गई। जिस कन्या से उसका विवाह हुआ था उस कन्या की माता मंगला गौरी व्रत किया करती थी।

मां गौरी के इस व्रत की महिमा के प्रभाव से  चलते उस महिला की कन्या को आशीर्वाद प्राप्त था कि वह कभी विधवा नहीं हो सकती। कहा जाता है कि अपनी माता के इसी व्रत के प्रताप से धरमपाल की बहु को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति हुई और उसके पति को 100 वर्ष की लंबी आयु प्राप्त हुई। तभी से ही मंगला गौरी व्रत की शुरुआत मानी गई है। धार्मिक मान्यता है कि ये व्रत करने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति तो होती ही है साथ ही दांपत्य जीवन में सदैव ही प्रेम भी बना रहता है।
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