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Pradosh Vrat 2024: बुध प्रदोष व्रत आज, जानें शिव पूजन का शुभ मुहूर्त और महत्व

Wed, 21 Feb 2024 07:16 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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फरवरी का दूसरा प्रदोष व्रत 2024 - फोटो : iStock
Pradosh Vrat 2024: पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह में कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का बहुत ही ज्यादा महत्व है। इस दिन लोग व्रत रखते हैं और विधि-विधान से भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करते हैं। कहा जाता है कि इस व्रत को करने भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों को सुख-शांति व समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। शिव पुराण के अनुसार जो व्यक्ति नियम और निष्ठा से प्रत्येक प्रदोष का व्रत रखता है उसके कष्टों का नाश होता है। त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष काल में माता पार्वती और भगवान भोलेशंकर की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष काल में की गई भगवान शिव की पूजा कई गुना ज्यादा फलदायी होती है। ऐसे में चलिए जानते हैं फरवरी का दूसरे प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व... 
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फरवरी का दूसरा प्रदोष व्रत 2024 - फोटो : iStock
फरवरी का दूसरा प्रदोष व्रत 2024
फरवरी का दूसरा प्रदोष व्रत 21 फरवरी 2024, बुधवार को है। जब त्रयोदशी तिथि बुधवार को होती है तो उसे बुध प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस दिन व्रत रखकर पूजा करने से शिव जी के साथ ही भगवान गणेश की भी कृपा प्राप्त होती है। 
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फरवरी का दूसरा प्रदोष व्रत 2024 - फोटो : iStock
बुध प्रदोष व्रत 2024 मुहूर्त
पंचांग के अनुसार माघ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 21 फरवरी 2024 को सुबह 11 बजकर 27 मिनट पर हो रही है। इसका समापन 22 फरवरी 2024 को दोपहर 01 बजकर 21 मिनट पर होगा। 

शिव पूजा समय - शाम 06 बजकर 15 मिनट से रात 08 बजकर 47 मिनट तक

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फरवरी का दूसरा प्रदोष व्रत 2024 - फोटो : iStock
बुध प्रदोष व्रत पूजा विधि
  • प्रदोष व्रत वाले दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान-ध्यान करें और उसके बाद पावन प्रदोष व्रत का संकल्प लें और शिव का पूजन करें। 
  • दिन में भगवान शिव का मनन एवं कीर्तन करते हुए शाम के समय एक बार फिर स्नान करें और सूर्यास्त के समय प्रदोषकाल में भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करें। 
  • इसके बाद प्रदोष व्रत की कथा सुनें या पढ़ें।
  • इस दिन कुश के आसन पर उत्तर-पूर्व की दिशा में बैठकर भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। 
  • कहा जाता है कि प्रदोष व्रत वाले दिन भगवान शंकर की पूजा में 'ऊं नम: शिवाय:' मंत्र का माला जप करने पर विशेष फल मिलता है। 
  • इसलिए जलाभिषेक के साथ ही 'ऊं नम: शिवाय:' का जाप भी करते रहें। 
  • इसके बाद भगवान शिव की बेल पत्र, गंगाजल, अक्षत और धूप-दीप आदि से पूजा करें।
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फरवरी का दूसरा प्रदोष व्रत 2024 - फोटो : iStock
बुध प्रदोष व्रत का महत्व
बुध प्रदोष व्रत करने से शिव जी की कृपा प्राप्त तो होती ही है। साथ ही बुध ग्रह को भी मजबूती मिलती है। कहा जाता है कि जिन दंपतियों को संतान रत्न की प्राप्ति करनी हो उन्हें बुध प्रदोष व्रत जरूर करना चाहिए। इस दिन प्रदोषकाल में की गई शिव साधना संतान को हर संकट से बचाती है। बुध प्रदोष व्रत के दिन बच्चों की समृद्धि के लिए सुबह और शाम के समय भगवान गणेश के सामने हरी इलायची अर्पित करें और 27 बार ॐ बुद्धिप्रदाये नमः मंत्र जाप करें। 
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