फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chandra Grahan 2025: ग्रहण के दौरान भोजन में तुलसी क्यों डाली जाती है? जानें तुलसी और कुशा का महत्व

Thu, 04 Sep 2025 03:55 PM IST
ज्योति मेहरा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

शास्त्रों में कहा गया है कि ग्रहण के समय राहु का प्रभाव बढ़ जाता है और नकारात्मक ऊर्जा का प्रसार होता है। इस दौरान लोग खाने में तुलसी के पत्ते डालते हैं, लेकिन क्या आप इसके पीछे की वजह जानते हैं। आइए जानते हैं कि ग्रहण के दौरान तुलसी और कुश का महत्व क्या है...
विज्ञापन
1 of 5
ग्रहण के दौरान तुलसी और कुशा का महत्व - फोटो : adobe stock
Chandra Grahan 2025: धार्मिक दृष्टिकोण से चंद्र ग्रहण को एक अशुभ घटना माना गया है। इस साल को दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण 7 सितंबर को लगने जा रहा है। यह खगोलीय घटना रात 9 बजकर 58 मिनट से शुरू होकर रात 1 बजकर 26 मिनट पर समाप्त होगी। शास्त्रों में कहा गया है कि ग्रहण के समय राहु का प्रभाव बढ़ जाता है और नकारात्मक ऊर्जा का प्रसार होता है। इस दौरान लोग खाने में तुलसी के पत्ते डालते हैं, लेकिन क्या आप इसके पीछे की वजह जानते हैं। आइए जानते हैं कि ग्रहण के दौरान तुलसी और कुश का महत्व क्या है...

Bhadrapada Purnima Stotra Lyrics: भाद्रपद पूर्णिमा पर करें इस स्तोत्र का पाठ, जीवन में आएगी समृद्धि
Pradosh Vrat: प्रदोष व्रत पर भगवान शिव को अर्पित करें ये चार फूल, पूरी होगी हर मनोकामना
 
 
विज्ञापन

2 of 5
तुलसीग्रहण के दौरान तुलसी और कुशा का महत्व - फोटो : freepik
तुलसी का महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल में तुलसी को अत्यंत शुभ माना जाता है। ग्रहण के दौरान दूध, जल और भगवान को अर्पित भोजन में तुलसी दल डालने से वह अशुद्ध नहीं होता और ग्रहण की नकारात्मकता का असर नहीं होता है। यही वजह है कि ग्रहण से पहले तुलसी का प्रयोग किया जाता है। 
 
विज्ञापन

3 of 5
ग्रहण के दौरान तुलसी और कुशा का महत्व - फोटो : Adobe stock
माना जाता है कि चंद्र ग्रहण शुरू होने से पहले घर में लगे तुलसी के पौधे को आंगन या घर के मध्य भाग में रख देना चाहिए। ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश नहीं कर पाती और वातावरण में सकारात्मकता रहता है।

Chandra Grahan 2025: चंद्र ग्रहण पर गर्भवती महिलाएं बरतें विषेश सावधानी, करें इन मंत्रों का जाप

4 of 5
ग्रहण के दौरान तुलसी और कुशा का महत्व - फोटो : adobe
कुशा का महत्व
कुशा को भी शास्त्रों में अत्यंत शुभ माना गया है। ऐसा माना जाता है कि यह माता सीता के केशों से उत्पन्न हुई थी, वहीं दूसरी मान्यता के अनुसार यह भगवान विष्णु के वामन अवतार के समय उनके गिरे हुए बालों से उत्पन्न हुई। इसीलिए ग्रहण काल में कुशा का प्रयोग फलदायी माना जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
ग्रहण के दौरान तुलसी और कुशा का महत्व - फोटो : adobe
ग्रहण के समय भोजन और अन्य वस्तुओं को सुरक्षित रखने के लिए कुशा का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार ग्रहण दोष से बचाव के लिए पुरुष अपने कान के ऊपर कुशा का तिनका लगा सकते हैं और महिलाएं इसे अपनी चोटी में धारण कर सकती हैं। जिन जातकों की राशि पर ग्रहण का सीधा प्रभाव पड़ता है, उन्हें कुशा की पवित्री पहननी चाहिए।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें