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Pitru Paksha: पितरों को किस विधि से करें जल अर्पित? जानें पूरी विधि

Thu, 04 Sep 2025 01:23 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Pitru Paksha 2025: इस वर्ष पितृ पक्ष की शुरुआत 7 सितंबर 2025 को हो रही है, और विशेष बात यह है कि इसी दिन पूर्ण चंद्र ग्रहण भी है। ऐसी स्थिति में धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। शास्त्रों के अनुसार, पितृ पक्ष में विधिपूर्वक जल अर्पण करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। 
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पितरों को जल अर्पण करने की विधि - फोटो : अमर उजाला
How to Offer Water To Pitru: हिंदू धर्म में पितृ पक्ष एक ऐसा पावन समय होता है, जब हम अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, आभार और सम्मान प्रकट करते हैं। यह केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चले आ रहे उस रिश्ते को निभाने का अवसर है जो हमारे अस्तित्व की जड़ से जुड़ा है। हर साल भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से अमावस्या तक का यह पंद्रह दिवसीय काल श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और जल अर्पण जैसे कर्मों के माध्यम से पितरों को स्मरण करने और उन्हें संतुष्ट करने के लिए समर्पित होता है।

इस वर्ष पितृ पक्ष की शुरुआत 7 सितंबर 2025 को हो रही है, और विशेष बात यह है कि इसी दिन पूर्ण चंद्र ग्रहण भी है। ऐसी स्थिति में धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। शास्त्रों के अनुसार, पितृ पक्ष में विधिपूर्वक जल अर्पण करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है, वे प्रसन्न होकर अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं और जीवन में आने वाली कई बाधाओं को दूर करते हैं। यही कारण है कि पूरे पितृ पक्ष में जल अर्पण को अत्यंत पुण्यदायी और फलदायी माना गया है।
 
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स्नान और शुद्ध वस्त्र पहनना - फोटो : freepik
स्नान और शुद्ध वस्त्र पहनना
पितृ पक्ष के दौरान पितरों को जल अर्पित करने से पहले स्वयं का स्नान करना आवश्यक होता है। स्नान करने से शरीर और मन दोनों शुद्ध हो जाते हैं। इसके बाद स्वच्छ और साफ़ वस्त्र पहनकर ही जल अर्पित करने का कार्य करना चाहिए। यह पूरी प्रक्रिया श्रद्धा और भक्ति के साथ करनी चाहिए ताकि पितरों को उचित सम्मान मिल सके।
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जल अर्पित करने से पहले दोनों हाथों में तांबे का लोटा पकड़ें और उसे सिर के ऊपर उठाएं। - फोटो : adobe stock
सूर्य की दिशा में मुख करके जल अर्पित करना
जल अर्पित करते समय अपने चेहरे को पूर्व या उगते सूर्य की दिशा की ओर करना शुभ माना जाता है। जल अर्पित करने से पहले दोनों हाथों में तांबे का लोटा पकड़ें और उसे सिर के ऊपर उठाएं। इसके बाद मंत्र जाप करते हुए धीरे-धीरे जल को सूर्य की दिशा में प्रवाहित करें। ऐसा करने से पितरों को अधिक सुख और संतुष्टि मिलती है।

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तांबे का लोटा शुद्ध और पवित्र माना जाता है, जो जल को ऊर्जा और सकारात्मकता से भर देता है। - फोटो : अमर उजाला।
तांबे के लोटे का प्रयोग
पितरों को जल अर्पित करने के लिए तांबे का लोटा सबसे उपयुक्त माना गया है। तांबे का लोटा शुद्ध और पवित्र माना जाता है, जो जल को ऊर्जा और सकारात्मकता से भर देता है। जल अर्पित करने के लिए ऐसी जगह चुनें जो शांत और एकांत हो, ताकि विधि-विधान पूरी श्रद्धा से पूरी हो सके। ऐसी जगह हो जहाँ परिवार के लोग बार-बार ना आते-जाते हों।
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मंत्र के साथ जल अर्पण करने से कर्मों का प्रभाव और भी अधिक मजबूत होता है। - फोटो : amar ujala
मंत्र का उच्चारण
जल अर्पित करते समय मंत्र जाप अत्यंत आवश्यक होता है। इस प्रक्रिया में “ॐ पितृभ्यो नम:” मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। इस मंत्र के उच्चारण से पितृ दोष दूर होता है और पितरों को आशीर्वाद प्राप्त होता है। मंत्र के साथ जल अर्पण करने से कर्मों का प्रभाव और भी अधिक मजबूत होता है।
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जल में काले तिल डालकर उसे तांबे के लोटे में लेकर सिर के ऊपर उठाएं और मंत्र जाप के साथ जल अर्पित करें। - फोटो : Adobe Stock
काले तिल और धूप का महत्व
पितरों को जल अर्पित करने वाले जल में काले तिल डालना चाहिए। काले तिल पितृ संबंधी अनुकूलता का प्रतीक होते हैं और यह जल को पवित्रता प्रदान करते हैं। जल में काले तिल डालकर उसे तांबे के लोटे में लेकर सिर के ऊपर उठाएं और मंत्र जाप के साथ जल अर्पित करें। इस दौरान धूप और दिया जलाना भी आवश्यक होता है क्योंकि इससे पितरों की नाराजगी दूर होती है और वातावरण पवित्र बनता है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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