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Chaitra Navratri 2022: नवरात्रि के दूसरे दिन करें तप की देवी मां ब्रह्मचारिणी की करें पूजा, जानें विधि, कथा, मंत्र और सब कुछ

Sun, 03 Apr 2022 07:36 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमरउजाला, नई दिल्ली
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पौराणिक कथाओं के अनुसार मां ब्रह्मचारिणी तप की देवी हैं जिस कारण उनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा था। - फोटो : amar ujala
Chaitra Navratri 2022: आज से चैत्र नवरात्रि आरंभ हो गए हैं। नवरात्रि साल में दो बार आने हिंदू धर्म का बेहद ही खास त्योहार है। नवरात्रि में 9 दिनों तक माता रानी के भक्त उनके 9 स्वरूपों की पूजा करते हैं। जिसमें से पहले दिन दुर्गा मां के शैलपुत्री रूप की पूजा की जाती है। इस दिन लोग अपने घरों में कलश स्थापना करते हैं और फिर 9 दिनों तक पूजा करते हैं। नवरात्रि में दूसरे दिन मां दुर्गा के ब्रह्माचारिणी रूप को पूजा की जाती हैं।  इस दिन विशेष रूप से माता की कृपा पाने के लिए भक्त तरह-तरह के जतन करते हैं, व्रत रखते हैं, मन्नत मांगते हैं और भोग आदि तैयार करते हैं। माना जाता है कि मां ब्रह्मचारिणी संसार में ऊर्जा का प्रवाह करती हैं और मनुष्य को उनकी कृपा से आंतरिक शांति प्राप्त होती है।  पौराणिक कथाओं के अनुसार मां ब्रह्मचारिणी तप की देवी हैं जिस कारण उनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा था।  आइए जानते हैं देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि, कथा, मंत्र आदि के बारे में। 
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ब्रह्माचारिणी का अर्थ हैं- तप का आचरण करने वाली। इसलिए देवी ब्रह्मचारिणी को तपस्चारिणी भी कहते हैं।
चैत्र नवरात्रि के द्वितीय दिन होती हैं मां ब्रह्मचारिणी की पूजा 
नवरात्रि में दूसरे दिन मां दुर्गा के ब्रह्माचारिणी रूप को पूजा की जाती हैं। ब्रह्म का मतलब तपस्या होता है, तो वहीं चारिणी का मतलब आचरण करने वाली। इस तरह ब्रह्माचारिणी का अर्थ हैं- तप का आचरण करने वाली। इसलिए माता को तपस्चारिणी भी कहते हैं।  मां ब्रह्माचारिणी के दाहिने हाथ में मंत्र जपने की माला और बाएं में कमंडल है। इनको ज्ञान और तप की देवी माना जाता हैं। कहते हैं कि जो भी भक्त सच्चे मन से मां ब्रह्माचारिणी की पूजा करते हैं, उन्हें धैर्य के साथ और ज्ञान की प्राप्ति होती है। साथ ही साथ मनुष्य का कठिन से कठिन परिस्थिति में भी मन विचलित नहीं होता। 
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मान्यता है कि माता ने कई हजार वर्षों तक निर्जल और निराहार रहकर कठोर तपस्या की। - फोटो : istock
मां ब्रह्माचारिणी की कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार देवी ब्रह्मचारिणी ने पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री के रूप पर जन्म लिया। उस समय  भगवान शंकर को पति के रूप में पाने के लिए नारद जी की सलाह पर उन्होंने बेहद ही कठोर तपस्या की थी। इस तपस्या के चलते ही उनका नाम ब्रह्माचारिणी पड़ा। एक हजार सालों तक उन्होंने फल और फूल खाकर समय बिताया। साथ ही सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर तपस्या की। मान्यता है कि माता ने कई हजार वर्षों तक निर्जल और निराहार रहकर कठोर तपस्या की। उनकी भक्ति से सभी देवता प्रसन्न हुए और उन्हें मनोकामना पूर्ति का वरदान दिया। 

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मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने के लिए सबसे पहले ब्रह्ममुहूर्त पर उठकर स्नान कर लें।  - फोटो : istock
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि
  • मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने के लिए सबसे पहले ब्रह्ममुहूर्त पर उठकर स्नान कर लें। 
  • पूजा के लिए सबसे पहले आसन बिछाएं इसके बाद आसन पर बैठकर मां की पूजा करें। 
  • इसके बाद माता को  फूल, अक्षत, रोली, चंदन आदि चढ़ाएं। 
  • ब्रह्मचारिणी मां को भोगस्वरूप पंचामृत चढ़ाएं। इसके साथ ही मिठाई का भोग लगाएं। 
  • इसके साथ ही माताको  पान, सुपारी, लौंग अर्पित करें। 
  • इसके उपरांत देवी ब्रह्मचारिणी मां के मंत्रों का जाप करें और फिर मां की आरती करें।  
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चैत्र नवरात्रि के दौरान मां ब्रह्मचारिणी मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है।  - फोटो : istock
मां ब्रह्मचारिणी का करें मंत्रजाप  
चैत्र नवरात्रि के दौरान मां ब्रह्मचारिणी मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। 
मां ब्रह्मचारिणी बीज मंत्र 
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नम

मां ब्रह्मचारिणी का मंत्र इस प्रकार है-
या देवी सर्वभेतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। 
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। 
दधाना कर मद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू। 
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।
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देवी ब्रह्मचारिणी मां के मंत्रों का जाप करें और फिर मां की आरती करें। - फोटो : अमर उजाला
ब्रह्माचारिणी देवी की आरती
जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता।
जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।
ब्रह्मा जी के मन भाती हो।
ज्ञान सभी को सिखलाती हो।
ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।
जिसको जपे सकल संसारा।
जय गायत्री वेद की माता।
जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।
कमी कोई रहने न पाए।
कोई भी दुख सहने न पाए। 
उसकी विरति रहे ठिकाने।
जो तेरी महिमा को जाने।
रुद्राक्ष की माला ले कर।
जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।
आलस छोड़ करे गुणगाना।
मां तुम उसको सुख पहुंचाना।
ब्रह्माचारिणी तेरो नाम।
पूर्ण करो सब मेरे काम।
भक्त तेरे चरणों का पुजारी।
रखना लाज मेरी महतारी।
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