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शगुन शास्त्र: पशु-पक्षी कैसे देते हैं भावी घटनाओं के संकेत, जानकार रह जाएंगे आप हैरान

Wed, 30 Jun 2021 07:10 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन, वास्तुविद
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माना जाता हैं कि मनुष्य की अपेक्षा पक्षी और जीव-जंतुओं की इंद्रियां प्रकृति के इशारे को जल्दी समझती हैं।
अगर आप प्रकृति के संकेतों को पहचानते और उन पर अमल करते हैं, तो संभव है कि आपको कुछ शुभ संकेत मिलें और कुछ संकेत ऐसे होते हैं जो हमें संकट में फंसने से बचाते हैं। आपमें से अधिकतर लोगों ने अपने बुजुर्गों से ये तो सुना ही होगा कि जीव-जंतुओं को भविष्य में घटित होने वाली घटनाओं या प्राकृतिक संकटों का आभास पहले से ही हो जाता है। माना जाता हैं कि मनुष्य की अपेक्षा पक्षी और जीव-जंतुओं की इंद्रियां प्रकृति के इशारे को जल्दी समझती हैं। पशु-पक्षियों के इन्हीं हाव-भाव, आचरणों आदि का अध्ययन कर प्राचीन मनीषियों ने इनके आचरण के आधार पर अनेकों प्रकार के भविष्य संकेत का उल्लेख किया हैं । भूकंप, बाढ़, वर्षा एवं शुभ-अशुभ आदि का ज्ञान इन्हें पहले से ही हो जाता है। आइए जानते हैं कौनसे पशु-पक्षी क्या देते हैं भविष्य संकेत सूचना

छिपकली
शगुन शास्त्र के अनुसार छिपकली का किसी विशेष समय पर दिखना बहुत शुभ माना गया है। इसके अलावा छिपकली शरीर के किस हिस्से पर गिरी है यह भी शुभता और अशुभता का संकेत देता है। शास्त्रों में प्रचलित मान्यता के अनुसार अगर छिपकली दिवाली की रात को दिख जाए तो उस घर में लक्ष्मीजी की कृपा बनी रहती है।
 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कौवा
कौवों के आचरण में भी कई शुभ-अशुभ संकेत देखने को मिलते हैं। कौवे का स्पर्श अनिष्टकारी माना गया है। कौआ यदि किसी मनुष्य के कंधे पर बैठ जाए या सिर पर बीट कर दे तो इसे धनहानि या बीमारी का संकेत माना जाता है। समूह में कौवों का किसी घर के ऊपर आवाज करते हुए मंडराना भी उस गृहस्वामी के लिए हानिप्रद है। प्रातःकाल की बेला में कौवा दिख जाने पर दिन भर परेशानी का द्योतक होता है। वहीं सुबह के समय छत्त या मुंडेर से कौवा जोर-जोर से बोलता है तो यह किसी मेहमान के आने की भी सूचना देता है। वर्षा ऋतु में कौवों के झुण्ड का बिना ध्वनि किये अपने घोंसले में लौटना तेज बारिश होने का परिचायक है। इसी प्रकार यात्रा के समय अगर रास्ते में कौआ पानी पीता दिख जाए तो इसे शुभ माना जाता है। इसी तरह सूर्योदय के समय यदि कौआ आपके घर के सामने आवाज करता है तो धन में वृद्धि तथा मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि की सूचना देता है।
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उल्लू - फोटो : Social media
उल्लू 
उल्लू को मां लक्ष्मीजी का वाहन माना गया है। मान्यता है कि उल्लू का दाहिनी तरफ देखना या बोलना हमेशा अशुभ होता है, इसलिए जब भी उल्लू की आवाज सुनाई देती है तो इसे अपशगुन माना जाता है। लेकिन उल्लू का बांई ओर देखना शुभ रहता है। कहा जाता है कि अगर उल्लू से आपकी नजरें मिल जाएं तो धन-सम्पत्ति में फायदा होता है। शगुन शास्त्र के अनुसार अगर उल्लू किसी रोगी को छूते हुए निकल जाए या उसके ऊपर से उड़ता हुआ निकल जाए तो रोगी के रोग दूर हो जाते हैं। वहीं उल्लू घर की छत पर आ बैठे या फिर आवाज करे तो इसे अच्छा नहीं माना जाता है।

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पुंगनूर गाय की बछिया
गाय
अगर आप यात्रा के लिए जा रहे हैं और आपको रास्ते में गाय दिख जाए या गाय अपने बछड़े को दूध पिलाते हुए दिख जाए तो आपकी यात्रा सफल होती है। लेकिन यदि यात्रा पर निकलते वक्त गाय के लगातार रंभाने की आवाज सुनाई दे तो आपकी यात्रा में कठिनाईयां आ सकती हैं।
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Sniffer Dog - फोटो : पेक्सेल्स
अन्य पशु-पक्षियों के संकेत
गिरगिट को वर्षा का मापक यंत्र के तौर पर माना जाता है। गिरगिट का रंग गहरा होना अच्छी वर्षा का संकेत देता है। प्रातःकाल में या घर से निकलते वक्त आपको हंस, सफेद घोड़ा, मोर, तोता या गाय दिख जाएं तो यह भी शुभ माना जाता है। कहीं जाते समय यदि कुत्ता सामने आकर भौंकने लगे या अपने कान फड़फड़ाने लगे तो इसे अशुभ माना जाता है। बिल्ली भी भावी आकस्मिक घटना की सूचक है। किसी व्यक्ति के घर से बाहर निकलते हीं यदि बिल्ली रास्ता काट कर भाग जावे तो उस कार्य विशेष में बाधा उत्पन्न हो सकती है तथा मार्ग में कोई अप्रिय घटना स्थिति भी होना सम्भावित है। बिलों में रहने वाले सांप और चूहे जैसे जीव भी भूकंप की तरंगों को पहले महसूस कर लेते हैं भूकंप के खतरे का आभास होते ही ये बिल से बाहर आ जाते हैं।
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