Ahilya Bai Jayanti
- फोटो : मंदिर प्रशासन
मंदिरों के पुनर्निर्माण में अहिल्या बाई का अमर योगदान
अहिल्या बाई होलकर ने देश भर में प्राचीन और पवित्र मंदिरों की दुर्दशा को देखकर उनके पुनर्निर्माण का महत्त्वपूर्ण कार्य अपने निजी संसाधनों से प्रारंभ किया। उस समय कई धार्मिक स्थल, जो सदियों से श्रद्धालुओं के लिए पूजा-अर्चना के केंद्र थे, टूट-फूट और खंडहर की स्थिति में थे। ऐसे मंदिरों की देखभाल और पुनर्स्थापना के लिए किसी सरकारी सहायता का अभाव था, परंतु अहिल्या बाई ने इस जिम्मेदारी को खुद अपने कंधों पर लिया। उन्होंने विशेष रूप से 12 ज्योतिर्लिंगों, चार धामों और सप्तपुरी जैसे धार्मिक स्थलों को पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठाया। इन तीर्थस्थलों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यंत बड़ा है, और इनके संरक्षण से पूरे देश की आस्था और परंपराएं जीवित रहीं। काशी के विश्वनाथ मंदिर, जो भगवान शिव का एक अत्यंत पवित्र स्थान है, का पुनर्निर्माण भी उनके प्रयासों से संभव हो सका। इसके अतिरिक्त, सोमनाथ मंदिर, जो भारत के सबसे प्राचीन और प्रतिष्ठित शिव मंदिरों में से एक है, गया, जो एक प्रमुख पौराणिक तीर्थस्थल है, तथा उज्जैन के महाकाल मंदिर का जीर्णोद्धार भी उनके योगदान से हुआ।