आश्विन,कार्तिक और मार्गशीर्ष
आश्विन के शुभ मास में जूही, चमेली, कमल तथा नाना प्रकार के शुभपुष्पों द्वारा श्री हरि का पूजन करना चाहिए। ऐसा करने से मनुष्य इस पृथ्वी पर धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पदार्थ प्राप्त कर लेता है। कार्तिक मास आने पर परमेश्वर श्री विष्णु की पूजा तिल अथवा उस समय के जितने भी ऋतु के अनुकूल पुष्प हैं वे सभी माधव को अर्पण करने चाहिए। मार्गशीर्ष मास जो कि श्री कृष्ण का ही स्वरुप है,इसमें नाना प्रकार के पुष्पों, उत्तम नैवेद्यों, धूपों तथा आरती आदि के द्वारा प्रसन्नता पूर्वक श्री जनार्दन का पूजन करके सभी सांसारिक कष्टों से मुक्ति मिलती है।