शादी जोड़ा
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पुज्यौ यथा स्वौ पितरौ ममापि तथेशभक्तो निजकर्म कुर्या:,
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं द्वितीयम !!
अर्थ- इस दूसरे वचन में कन्या वर से कहती है कि "आप जिस तरह अपने माता -पिता का सम्मान करते हैं, ठीक वैसे ही आप मेरे माता-पिता का भी सम्मान करेंगे। मेरे परिवार की मर्यादा का भी पालन करेंगे। यदि आप मेरे बातों से सहमत हैं तो मैं आपके साथ जीवन यापन के लिए तैयार हूं।"