15 मई को ज्येष्ठ महीने की अमावस्या को शनि जयंती है। ऐसी मान्यता है इस दिन जो भी शनिदेव की पूजा करता है उस पर उनकी कृपा होती है। वैसे तो शनि मंदिर में महिलाओं के द्वारा पूजा करने पर इसका विरोध होता है लेकिन देश में एक ऐसा मंदिर है जहां पर महिला और पुरुषों दोनों को पूजा करने में कोई भी भेदभाव नहीं किया जाता। यहां पर महिलाएं न सिर्फ शनिदेव को तेल अर्पित करती हैं बल्कि मंदिर की बागडोर महिला पुजारी के हाथों में है।