नर और नारायण पर्वत श्रृंखलाओं की गोद में, अलकनंदा नदी के बायीं तरफ बसे आदितीर्थ बद्रीनाथ धाम न सिर्फ श्रद्धा व आस्था का अटूट केंद्र है, बल्कि अपने अद्वितीय प्राकृतिक सौंदर्य से भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यह तीर्थ हिंदुओं के चार प्रमुख धामों में से एक है। यह पवित्र स्थल भगवान विष्णु के चतुर्थ अवतार नर एवं नारायण की तपोभूमि है।
इस धाम के बारे में कहावत है कि-"जो जाए बद्री, वो न आए ओदरी" यानि जो व्यक्ति बद्रीनाथ के दर्शन कर लेता है, उसे माता के गर्भ में दोबारा नहीं आना पड़ता, प्राणी जन्म और मृत्यु के चक्र से छूट जाता है। ऋषिकेश से यह धाम 294 कि.मी.की दूरी पर उत्तर दिशा स्थित में है। यह पंच बद्री में से एक बद्री भी है। उत्तराखंड में पंच बद्री, पंच केदार तथा पंच प्रयाग पौराणिक व धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते है।