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Yogini Ekadashi 2025: योगिनी एकादशी व्रत रखने के क्या हैं महत्व? जानिए पूजा विधि और व्रत कथा

Sat, 21 Jun 2025 06:44 AM IST
शिखर बरनवाल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Yogini Ekadashi Vrat Katha 2025: इस वर्ष योगिनी एकादशी आज यानी 21 जून को मनाई जा रही है। आइए इस लेख में योगिनी एकादशी व्रत करने के फायदे जानते हैं, साथ ही इसकी पूजा विधि और इसकी पौराणिक कथा के बारे में भी जानते हैं।
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भगवान विष्णु - फोटो : Adobe Stock
Yogini Ekadashi Vrat 2025: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, और सभी एकादशियों में योगिनी एकादशी का अपना एक खास स्थान है। यह पवित्र तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है और आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष में आती है। इस साल, 21 जून, 2025 को यह पावन योगिनी एकादशी मनाई जा रही है। यह व्रत सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का एक शक्तिशाली माध्यम माना जाता है।

मान्यता है कि योगिनी एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति के समस्त पापों का नाश होता है, उसे स्वास्थ्य लाभ मिलता है, और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। यह एकादशी न केवल आध्यात्मिक शांति प्रदान करती है, बल्कि जीवन को शुद्ध और पवित्र बनाने में भी सहायक है। आइए इस लेख में जानते हैं योगिनी एकादशी व्रत के क्या फायदे हैं, साथ ही इसकी पूजा विधि और इसकी पौराणिक कथा के बारे में भी जानेंगे।
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भगवान विष्णु - फोटो : Adobe Stock
योगिनी एकादशी व्रत के महत्व
पद्म पुराण और स्कंद पुराण के अनुसार, योगिनी एकादशी का व्रत 88,000 ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान पुण्य देता है। यह व्रत पापों का नाश करता है, विशेष रूप से पूर्व जन्मों के पापों से मुक्ति दिलाता है। यह कुष्ठ रोग और अन्य शारीरिक व्याधियों से राहत देता है। मान्यता है कि इस व्रत से मानसिक शांति, सुख-समृद्धि, और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह गृह कलह को दूर करता है और धन के नए मार्ग खोलता है।

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भगवान विष्णु - फोटो : Adobe Stock
योगिनी एकादशी पूजा विधि
योगिनी एकादशी के दिन पूजा विधि का पालन श्रद्धा और भक्ति के साथ करना चाहिए। प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ पीले वस्त्र पहनें। पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र कर लकड़ी की चौकी पर पीला वस्त्र बिछाएं, फिर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। 

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पूजा थाली - फोटो : freepik
पूजा सामग्री के रूप में पीले फूल, तुलसी पत्र, पंचामृत, मिठाई, चंदन, अक्षत, धूप, दीप, और फल अर्पित करें। इसके बाद "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र की 108 बार माला जपें और विष्णु सहस्रनाम या विष्णु चालीसा का पाठ करें। योगिनी एकादशी की कथा पढ़ें या सुनें, और रात्रि में भगवान के भजन-कीर्तन के साथ जागरण करें। द्वादशी तिथि पर ब्राह्मणों को दान देकर व्रत का पारण करें और फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण करें।

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भगवान विष्णु - फोटो : Adobe Stock
योगिनी एकादशी व्रत कथा
पद्म पुराण के अनुसार, स्वर्ग की अलकापुरी नगरी में राजा कुबेर रहते थे। बता दें कि राजा कुबेर भगवान शिव के परम भक्त थे। उनका सेवक हेम माली प्रतिदिन मानसरोवर से पूजा के लिए फूल लाता था। उसकी पत्नी विशालाक्षी अत्यंत सुंदर थी। एक दिन, हेम माली अपनी पत्नी के प्रेम में लीन होकर फूल समय पर न ला सका। इससे क्रुद्ध कुबेर ने उसे कुष्ठ रोग और पत्नी से वियोग का श्राप दिया। हेम माली भटकते हुए मार्कण्डेय ऋषि के आश्रम पहुंचा और अपनी व्यथा सुनाई। ऋषि ने उसे योगिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। हेम माली ने विधिवत व्रत किया, जिससे उसका कुष्ठ रोग ठीक हुआ और वह अपनी पत्नी के साथ सुखी जीवन जीने लगा।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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