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Ashadha Amavasya 2025: आषाढ़ अमावस्या पर इन तीन उपायों से पाएं पितरों का आशीर्वाद, दूर होंगे सभी दोष

Thu, 19 Jun 2025 04:09 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Ashadha Amavasya 2025: इस वर्ष 25 जून 2025 को आषाढ़ अमावस्या है। इस दिन मृगशिर्षा नक्षत्र और गण्ड व वृद्धि योग का संयोग बन रहा है। 
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Ashadha Amavasya 2025 - फोटो : adobe
Ashadha Amavasya 2025: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को पितरों की कृपा प्राप्ति का सबसे उत्तम दिन माना जाता है। इस तिथि पर पवित्र नदियों में स्नान व दान-दक्षिणा जैसे पुण्य कार्य करने से पितृ दोष से मुक्ति प्राप्त होती है। इसके अलावा अमावस्या पर धूप-ध्यान करने का भी विधान है। यदि अमावस्या तिथि पर दोपहर के समय कंडे के अंगारों पर गुड़ और घी से धूप दान किया जाए, तो गृह दोष, कलह और कर्ज से छुटकारा मिलता है। इस दौरान सभी माह में आषाढ़ माह की अमावस्या को और भी खास माना गया है। इस अमावस्या पर वस्त्र-भोजन का दान करने से कुंडली के दोष कम होते हैं। इस वर्ष 25 जून 2025 को आषाढ़ अमावस्या है। इस दिन मृगशिर्षा नक्षत्र और गण्ड व वृद्धि योग का संयोग बन रहा है। ऐसे में पितर चालीसा, पितृ स्तोत्र और कुछ खास मंत्रों का जाप करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती हैं। आइए इनके बारे में जानते हैं।
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आषाढ़ अमावस्या - फोटो : Amar Ujala

पितृ चालीसा

।। दोहा ।।

हे पितरेश्वर आपको दे दो आशीर्वाद,

चरण शीश नवा दियो रख दो सिर पर हाथ।

सबसे पहले गणपत पाछे घर का देव मनावा जी।

हे पितरेश्वर दया राखियो,करियो मन की चाया जी।।

चौपाई

पितरेश्वर करो मार्ग उजागर,

चरण रज की मुक्ति सागर ।

परम उपकार पित्तरेश्वर कीन्हा,

मनुष्य योणि में जन्म दीन्हा ।

मातृ-पितृ देव मन जो भावे,

सोई अमित जीवन फल पावे ।

जै-जै-जै पितर जी साईं,

पितृ ऋण बिन मुक्ति नाहिं ।

चारों ओर प्रताप तुम्हारा,

संकट में तेरा ही सहारा ।

नारायण आधार सृष्टि का,

पित्तरजी अंश उसी दृष्टि का ।

प्रथम पूजन प्रभु आज्ञा सुनाते,

भाग्य द्वार आप ही खुलवाते ।

झुंझुनू में दरबार है साजे,

सब देवों संग आप विराजे ।

प्रसन्न होय मनवांछित फल दीन्हा,

कुपित होय बुद्धि हर लीन्हा ।

पित्तर महिमा सबसे न्यारी,

जिसका गुणगावे नर नारी ।

तीन मण्ड में आप बिराजे,

बसु रुद्र आदित्य में साजे ।

नाथ सकल संपदा तुम्हारी,

मैं सेवक समेत सुत नारी ।

छप्पन भोग नहीं हैं भाते,

शुद्ध जल से ही तृप्त हो जाते ।

तुम्हारे भजन परम हितकारी,

छोटे बड़े सभी अधिकारी ।

भानु उदय संग आप पुजावै,

पांच अँजुलि जल रिझावे ।

ध्वज पताका मण्ड पे है साजे,

अखण्ड ज्योति में आप विराजे ।

सदियों पुरानी ज्योति तुम्हारी,

धन्य हुई जन्म भूमि हमारी ।

शहीद हमारे यहाँ पुजाते,

मातृ भक्ति संदेश सुनाते ।

जगत पित्तरो सिद्धान्त हमारा,

धर्म जाति का नहीं है नारा ।

हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सब पूजे पित्तर भाई ।

हिन्दू वंश वृक्ष है हमारा,

जान से ज्यादा हमको प्यारा ।

गंगा ये मरुप्रदेश की,

पितृ तर्पण अनिवार्य परिवेश की ।

बन्धु छोड़ ना इनके चरणाँ,

इन्हीं की कृपा से मिले प्रभु शरणा ।

चौदस को जागरण करवाते,

अमावस को हम धोक लगाते ।

जात जडूला सभी मनाते,

नान्दीमुख श्राद्ध सभी करवाते ।

धन्य जन्म भूमि का वो फूल है,

जिसे पितृ मण्डल की मिली धूल है ।

श्री पित्तर जी भक्त हितकारी,

सुन लीजे प्रभु अरज हमारी ।

निशिदिन ध्यान धरे जो कोई,

ता सम भक्त और नहीं कोई ।

तुम अनाथ के नाथ सहाई,

दीनन के हो तुम सदा सहाई ।

चारिक वेद प्रभु के साखी,

तुम भक्तन की लज्जा राखी ।

नाम तुम्हारो लेत जो कोई,

ता सम धन्य और नहीं कोई ।

जो तुम्हारे नित पाँव पलोटत,

नवों सिद्धि चरणा में लोटत ।

सिद्धि तुम्हारी सब मंगलकारी,

जो तुम पे जावे बलिहारी ।

जो तुम्हारे चरणा चित्त लावे,

ताकी मुक्ति अवसी हो जावे ।

सत्य भजन तुम्हारो जो गावे,

सो निश्चय चारों फल पावे ।

तुमहिं देव कुलदेव हमारे,

तुम्हीं गुरुदेव प्राण से प्यारे ।

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आषाढ़ अमावस्या - फोटो : amar ujala
पितृ मंत्र
  • ॐ पितृ देवतायै नम:
  • ॐ पितृ गणाय विद्महे जगतधारिणे धीमहि तन्नो पित्रो प्रचोदयात्।
  • ॐ देवताभ्य: पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च नम: स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नम:
  • ॐ देवताभ्य: पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च। नम: स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नम:।

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आषाढ़ अमावस्या - फोटो : freepik

पितृ स्तोत्र

अर्चितानाममूर्तानां पितृणां दीप्ततेजसाम् ।

 

नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम्।।

 

इन्द्रादीनां च नेतारो दक्षमारीचयोस्तथा ।

 

सप्तर्षीणां तथान्येषां तान् नमस्यामि कामदान् ।।

 

मन्वादीनां च नेतार: सूर्याचन्दमसोस्तथा ।

 

तान् नमस्यामहं सर्वान् पितृनप्युदधावपि ।।

 

नक्षत्राणां ग्रहाणां च वाय्वग्न्योर्नभसस्तथा ।

 

द्यावापृथिवोव्योश्च तथा नमस्यामि कृताञ्जलि:।।

 

देवर्षीणां जनितृंश्च सर्वलोकनमस्कृतान् ।

 

अक्षय्यस्य सदा दातृन् नमस्येहं कृताञ्जलि: ।।

 

प्रजापते: कश्पाय सोमाय वरुणाय च ।

 

योगेश्वरेभ्यश्च सदा नमस्यामि कृताञ्जलि: ।।

 

नमो गणेभ्य: सप्तभ्यस्तथा लोकेषु सप्तसु ।

 

स्वयम्भुवे नमस्यामि ब्रह्मणे योगचक्षुषे ।।

 

सोमाधारान् पितृगणान् योगमूर्तिधरांस्तथा ।

 

नमस्यामि तथा सोमं पितरं जगतामहम् ।।

 

अग्रिरूपांस्तथैवान्यान् नमस्यामि पितृनहम् ।

 

अग्रीषोममयं विश्वं यत एतदशेषत: ।।

 

ये तु तेजसि ये चैते सोमसूर्याग्रिमूर्तय:।

 

जगत्स्वरूपिणश्चैव तथा ब्रह्मस्वरूपिण: ।।

 

तेभ्योखिलेभ्यो योगिभ्य: पितृभ्यो यतामनस:।

 

नमो नमो नमस्तेस्तु प्रसीदन्तु स्वधाभुज ।।
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आषाढ़ अमावस्या - फोटो : freepik
आषाढ़ अमावस्या तिथि
आषाढ़ कृष्ण अमावस्या आरंभ:  24 जून 2025, सायं 6:59 पर 
आषाढ़ कृष्ण अमावस्या समाप्त: 25 जून 2025, सायं 4:00 बजे  पर
आषाढ़ अमावस्या 25 जून 2025, बुधवार को 

आषाढ़ अमावस्या शुभ मुहूर्त
आषाढ़ अमावस्या के दिन स्नान-दान का शुभ मुहूर्त:  25 जून, प्रातः 4:05 बजे से  प्रातः 4:45 बजे तक
सर्वार्थ सिद्धि योग: प्रातः 5:25 बजे से प्रातः 10:40 बजे तक 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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