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Vivah Panchami 2025: कब है विवाह पंचमी? जानें तिथि, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Wed, 12 Nov 2025 04:26 PM IST
सोनिया चौहान धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

विवाह पंचमी: मार्गशीर्ष माह के पंचमी तिथि पर विवाह पंचमी का पर्व मनाया जाता है। बता दें कि इस दिन भगवान राम और माता सीता का विवाह हुआ था। धार्मिक मान्यता हैं कि विवाह पंचमी के दिन भगवान राम और माता सीता की विधि-विधान के साथ पूजा करने से सभी तरह के वैवाहिक सुख, प्रेम और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। 

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विवाह पंचमी - फोटो : Amar Ujala
Vivah Panchami 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि विवाह पंचमी के नाम से जाना है। इसी माह में भगवान राम और माता सीता का विवाह हुआ था जिसके चलते यह महीना विशेष होता है। विवाह पंचमी के अवसर पर भगवान राम और माता सीता की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विवाह पंचमी के दिन जो कोई भी व्यक्ति मां सीता और प्रभु श्री राम का विवाह कराता है, उसके जीवन में सुख और समृद्धि आती है। इस वर्ष विवाह पंचमी का पर्व 25 नवंबर को है।
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विवाह पंचमी तिथि - फोटो : freepik
विवाह पंचमी तिथि 2025

हिंदू पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि की शुरुआत 24 नवंबर 2025 को रात 09 बजकर 22 मिनट पर होगी और इस तिथि का समापन 25 नवंबर को रात 10 बजकर 56 मिनट पर होगा। ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, 25 नवंबर 2025 को विवाह पंचमी का त्योहार बड़े ही भक्ति भाव और उत्साह के साथ मनाया जाता है। 
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विवाह पंचमी पूजा विधि - फोटो : freepik
विवाह पंचमी पूजा विधि

विवाह पंचमी के दिन भगवान श्रीराम और देवी सीता की पूजा करने का विशेष महत्व होता है। विवाह पंचमी के दिन सुबह स्न्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान राम और माता सीता की प्रतिमा अथवा चित्र को चौकी पर विराजमान करवाकर गंगा जल से स्नान कराएं और उसके बाद उन्हें पीले रंग के वस्त्र, पुष्प और भोग आदि अर्पण करें और धूप-दीप आदि से उनकी पूजा करें।

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विवाह पंचमी शुभ मुहूर्त - फोटो : freepik
विवाह पंचमी शुभ मुहूर्त

विवाह पंचमी पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 7:07 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक है, लेकिन इस दिन पूरे समय अबूझ मुहूर्त रहता है। अबूझ मुहूर्त का अर्थ है कि बिना पंचांग देखे, बिना ग्रह-नक्षत्र की चिंता किए शादी की जा सकती है। 
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विवाह पंचमी - फोटो : freepik
इस दिन शुभ योग में मांगलिक कार्यों को करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। कुंवारी कन्याओं के द्वारा इस दिन श्रीराम और सीताजी का पूजन-अनुष्ठान करने से मनचाहा वर मिलता है और विवाहित स्त्रियों के दांपत्य जीवन में खुशियां आती हैं। इसके अलावा विवाह पंचमी के दिन रामचरितमानस, रामरक्षास्रोत या सुंदरकांड का पाठ करना शुभ होता है। 



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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