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Vat Savitri Vrat 2021: जानें वट सावित्री व्रत की पूजा सामग्री और उनका महत्व

Mon, 07 Jun 2021 06:11 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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वट सावित्री व्रत 2021 - फोटो : अमर उजाला
Vat Savitri Vrat 2021: अखंड सौभाग्य प्राप्ति के लिए वट सावित्री व्रत हर साल ज्येष्ठ अमावस्या के दिन रखा जाता है। इस साल 10 जून गुरुवार को वट सावित्री व्रत रखा जाएगा। हिन्दू धर्म में इस व्रत का खास महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि ज्येष्ठ अमावस्या के दिन ही सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण बचाए थे। इसलिए वट सावित्री व्रत को विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी जीवन के लिए रखती हैं। विवाहित महिलाएं इस व्रत को विधि-विधान के साथ रखती हैं। इसके लिए विशेष पूजा सामग्री का ध्यान रखा जाता है। वैसे तो अमावस्या तिथि ही अपने आप में महत्वपूर्ण तिथि होती है। लेकिन ज्येष्ठ अमावस्या के दिन शनि जयंती भी मनाई जाती है। इसके अलावा इस साल वट सावित्री व्रत के दिन सूर्यग्रहण भी लग रहा है। हालांकि यह सूर्यग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इस कारण यहां पर इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। आइए जानते हैं वट सावित्री व्रत का पूजा मुहूर्त, व्रत सामग्री, व्रत विधि और महत्व।
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वट सावित्रि व्रत का मुहूर्त - फोटो : सोशल मीडिया
वट सावित्रि व्रत का मुहूर्त
अमावस्या तिथि प्रारम्भ - दोपहर 01:57 बजे (जून 09, 2021)
अमावस्या तिथि समाप्त - शाम 04:22 बजे (जून 10, 2021)
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वट सावित्री पूजा 2021 - फोटो : अमर उजाला
पूजा सामाग्री
सावित्री-सत्यवान की प्रतिमाएं, बांस का पंखा, लाल कलावा (मौली) या सूत, धूप-दीप, घी-बाती, पुष्प, फल, कुमकुम या रोली, सुहाग का सामान, पूरियां, गुलगुले, चना, बरगद का फल, कलश जल भरा हुआ।

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वट सावित्री व्रत विधि - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
वट पूर्णिमा व्रत विधि
सुबह प्रातः जल्दी उठें और स्नान करें। स्नान के बाद व्रत करने का संकल्प लें। शृंगार करें। इस दिन पीला सिंदूर लगाना शुभ माना जाता है। बरगद के पेड़ सावित्री-सत्यवान और यमराज की मूर्ति रखें। बरगद के पेड़ में जल डालकर उसमें पुष्प, अक्षत, फूल और मिठाई चढ़ाएं। सावित्री-सत्यवान और यमराज की मूर्ति रखें। बरगद के वृक्ष में जल चढ़ाएं। वृक्ष में रक्षा सूत्र बांधकर आशीर्वाद मांगें। वृक्ष की सात बार परिक्रमा करें। इसके बाद हाथ में काले चना लेकर इस व्रत का कथा सुनें। कथा सुनने के बाद पंडित जी को दान देना न भूलें। दान में आप वस्त्र, पैसे और चने दें। अगले दिन व्रत को तोड़ने से पहले बरगद के वृक्ष का कोपल खाकर उपवास समाप्त करें। 
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वट सावित्री का महत्व - फोटो : अमर उजाला
वट सावित्री व्रत का महत्व
वट पूर्णिमा व्रत को सावित्री से जोड़ा गया है। वही सावित्री जिनका पौराणिक कथाओं में श्रेष्ठ स्थान है। कहा जाता है कि सावित्री अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस ले आईं थी। इस व्रत में महिलाएं सावित्री के समान अपने पति की दीर्घायु की कामना तीनों देवताओं से करती हैं ताकि उनके पति को सुख-समृद्धि, अच्छा स्वास्थ्य और दीर्घायु प्राप्त हो सके।
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वट सावित्री व्रत 2021 - फोटो : social media
इस कारण होती है वट वृक्ष की पूजा
हिन्दू धर्म में वट वृक्ष को पूजनीय माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार बरगद के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) तीनों देवों का वास होता है। इसलिए बरगद के पेड़ की आराधना करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है। 
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